ब्लड ग्रुप से लेकर पसीने तक, मच्छरों के काटने को लेकर ये बातें नहीं जानते होंगे आप

गर्मी, सर्दी या फिर बारिश मौसम कोई भी हो मच्छर हैं कि पीछा ही नहीं छोड़ते. न तो ये रात में चैन से सोने देते हैं और न ही दिन में सुकून लेने देते हैं. अगर आप कहीं बाहर जाएं तो ये बड़ी संख्या में आपके सिर पर मंडराते हुए नजर आएंगे. ऐसे में डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारी का भी डर बना रहता है. लेकिन कुछ लोग कहते हैं कि उनको बाकियों की अपेक्षा ज्यादा मच्छर काटते हैं. क्या ऐसा सच में होता है और अगर यह सच है तो आखिर क्यों.
कई रिसर्च के नजीते यह बताते हैं कि इंसान का पसीना मच्छरों को बहुत आकर्षित करता है. इंसान के पसीने में लैक्टिक, यूरिक और अमीनो एसिड होता है.
पसीने की गंध मच्छरों को अपनी ओर आकर्षित करती है. इसीलिए जिनको ज्यादा पसीना होता है, उनको मच्छार ज्यादा काटते हैं.
पसीने के अलावा जिन लोगों की बॉडी हीट ज्यादा होती है, उनको भी बाकी लोगों की तुलना में मच्छर ज्यादा काटते हैं.
कुछ रिसर्च की मानें तो ओ ब्लड ग्रुप वाले लोगों को भी बाकी लोगों की तुलना में ज्यादा मच्छर काटने की संभावना होती है. ऐसे में ओ ब्लड ग्रुप वालों को मच्छरों से बचना चाहिए.
रिपोर्ट्स की मानें तो कुछ मच्छरों में देखने और रंगों की पहचान करने की भी क्षमता होती है. इसीलिए वे डार्क कलर की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं.
इथेनॉल की खुशबू मच्छरों को आकर्षित करती है. इसीलिए जो लोग ज्यादा शराब पीते हैं उनको भी मच्छर ज्यादा काटते हैं.
इंसान दिन की बजाय रात को सोते वक्त ज्यादा कार्बन-डाई-ऑक्साइड छोड़ता है. इसकी गंध से भी मच्छर उनकी ओर आकर्षित होते हैं.