Moon Recession: पृथ्वी से क्यों दूर होता जा रहा है चांद, क्या है वजह?

Moon Recession: चांद अरबों सालों से पृथ्वी का सबसे करीबी खगोलीय साथी रहा है लेकिन हर साल यह धीरे-धीरे पृथ्वी से दूर होता जा रहा है. वैसे तो रोजमर्रा की जिंदगी में इस बदलाव को महसूस करना मुश्किल है लेकिन वैज्ञानिकों ने इस बात की पुष्टि की है कि चांद हर साल पृथ्वी से लगभग 3.8 सेंटीमीटर दूर जा रहा है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.
वैज्ञानिकों का ऐसा कहना है कि चांद हर साल पृथ्वी से लगभग 3.8 सेंटीमीटर दूर जा रहा है. इससे वक्त के साथ इसकी कक्षा धीरे-धीरे बड़ी होती जा रही है.
चांद का गुरुत्वाकर्षण समुद्र में ज्वार भाटा पैदा करता है. क्योंकि पृथ्वी, चांद के कक्षा की तुलना में तेजी से घूमती है, इस वजह से ज्वारीय बल पृथ्वी से चांद तक ऊर्जा पहुंचाते हैं. इससे चंद एक ऊंची कक्षा में चला जाता है.
शोधकर्ताओं का ऐसा कहना है कि जबरदस्त टक्कर, शुरुआती पृथ्वी पर ज्वालामुखी गतिविधि और पृथ्वी के अंदरूनी हिस्से में लंबे समय तक हुए बदलाव ने भी चांद की कक्षा के विकास को प्रभावित किया है.
70 से 80 साल के औसत जीवन काल में चांद सिर्फ तीन मीटर ही दूर जाता है. इस वजह से सटीक वैज्ञानिक उपकरण के बिना इस असर को महसूस करना मुमकिन नहीं है.
जैसे-जैसे ऊर्जा चांद तक पहुंचती है पृथ्वी के घूमने की रफ्तार धीमी होती जाती है. अरबों साल पहले एक दिन लगभग 19 घंटे का होता था और आज 24 घंटे का होता है.
लगभग 60 करोड़ साल में चांद इतना छोटा दिखाई देगा की पूरे सूर्य ग्रहण के दौरान सूरज को पूरी तरह से नहीं ढक पाएगा. इसी के साथ कमजोर गुरुत्वाकर्षण समुद्र के ज्वार भाटा की ताकत को कम कर देगा.