Earth Shape: गोल ही क्यों है हमारी धरती, अगर चपटी होती तो क्या होता?

Earth Shape: रात के आसमान की तरफ देखें या फिर अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों पर नजर डालें तो एक बात साफ हो जाती है कि पृथ्वी गोल है. लेकिन यह सिर्फ इत्तेफाक नहीं है. इसके पीछे एक बड़ी वजह है. मगर सवाल यह उठता है कि अगर पृथ्वी चपटी होती तो क्या होता? आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब.
पृथ्वी के गोल होने की सबसे बड़ी वजह गुरुत्वाकर्षण है. द्रव्यमान वाली हर वस्तु पदार्थ को अपने केंद्र की तरफ खींचती है. इस घटना को गुरुत्वाकर्षण द्वारा समझाया जाता है. वक्त के साथ सभी दिशाओं से लगने वाला यह सामान खिंचाव पृथ्वी को सबसे स्थिर आकार यानी एक गोल में जमने पर मजबूर कर देता है.
हालांकि हम अक्सर पृथ्वी को एक गोला कहते हैं, लेकिन तकनीकी रूप से यह एक अंडाकार गोलाभ है. अपने रोटेशन की वजह से यह ग्रह भूमध्य रेखा पर थोड़ा उभरा हुआ और ध्रुव पर चपटा होता है. यह प्रभाव पृथ्वी के घूमने से उत्पन्न होने वाले अपकेंद्रीय बल के कारण होता है.
अगर पृथ्वी चपटी होती तो गुरुत्वाकर्षण हर जगह सीधे नीचे की तरफ नहीं खींचता. इसके बजाय यह डिस्क के केंद्र की ओर खींचता. इसका मतलब है कि जैसे-जैसे आप केंद्र से दूर जाते आपको ऐसा महसूस होता कि आप लगातार ऊपर की तरफ चढ़ रहे हैं. इमारत, पेड़ और यहां तक की लोग भी अंदर की तरफ झुक जाते.
पानी गुरुत्वाकर्षण को फॉलो करता है. एक चपटी पृथ्वी पर सभी महासागर डिस्क के केंद्र की तरफ बह जाते. इससे एक बड़ा केंद्रीय महासागर बन जाता और ग्रह के किनारे सूखे और बंजर रह जाते.
एक गोलाकार पृथ्वी स्थिर वायुमंडल और चुंबकीय क्षेत्र बनाए रखने में मदद करती है. इस आकार के बिना सौर हवा उस हवा को छीन सकती है जिसमें हम सांस लेते हैं. ऐसे समय में पृथ्वी एक बेजान ग्रह जैसी लगती. पृथ्वी पर सांस लेने लायक ऑक्सीजन ही नहीं होती और आसमान अंधेरा और खाली होता.
एक चपटी पृथ्वी पर दिन और रात का मौजूदा संतुलन मौजूद ही नहीं होता. पूरे ग्रह पर एक ही समय में दिन का उजाला या फिर अंधेरा हो सकता था.