Sugar In Beer: बीयर में क्यों मिलाई जाती है चीनी, इससे क्या पड़ता है फर्क?
सबसे पहले बीयर बनाने की प्रक्रिया को समझना जरूरी है. जब जौ को पानी में भिगोकर और अंकुरित करके माल्ट बनाया जाता है, तो उसमें प्राकृतिक शर्करा पैदा होती है. यही शर्करा फर्मेंटेशन के दौरान यीस्ट की मदद से अल्कोहल और कार्बन डाइऑक्साइड में बदलती है.
इस प्रक्रिया से बीयर में उसका स्वाद और हल्का झाग बनता है, लेकिन कई बार ब्रुअरीज अतिरिक्त चीनी मिलाती हैं, ताकि अल्कोहल का लेवल और स्वाद हल्का किया जा सके.
चीनी मिलाने के पीछे कई कारण होते हैं. सबसे बड़ा कारण है अल्कोहल का कंटेंट बढ़ाना. जब साधारण माल्ट पर्याप्त शर्करा नहीं देता, तो अतिरिक्त चीनी मिलाने से यीस्ट को और ज्यादा फीड मिलता है.
इससे अल्कोहल की मात्रा बढ़ जाती है और बीयर का असर ज्यादा स्ट्रॉन्ग हो सकता है. दूसरा कारण है स्वाद और कलर में बैलेंस करना. कुछ बीयर स्टाइल जैसे बेल्जियन एले या लाइट लेगर में चीनी का इस्तेमाल किया जाता है ताकि ड्रिंक ज्यादा स्मूद और ड्राई लगे.
इसके अलावा चीनी बीयर को हल्का करने में मदद करती है. माल्ट से बनी बीयर कई बार भारी और मीठी लग सकती है. ऐसे में ब्रुअर्स चीनी मिलाकर उसे बैलेंस करते हैं. इससे बीयर की बॉडी पतली हो जाती है और यह पीने में ज्यादा क्रिस्प और क्लीन स्वाद देती है.
यही वजह से एशिया और लैटिन अमेरिका के कई देशों में बनी बियर में चीनी मिलाना आम बात है. हालांकि ज्यादा चीनी मिलाने से बीयर का स्वाद आर्टिफिशियल या मीठा लग सकता है. यही कारण है कि प्रीमियम ब्रुअरीज और क्राफ्ट बीयर मेकर्स अक्सर प्राकृतिक माल्ट पर ही जोर देते हैं और एक्स्ट्रा चीनी का प्रयोग कम करते हैं.
वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो चीनी मिलाने से फर्मेंटेशन प्रक्रिया तेज हो जाती है, और अल्कोहल का स्तर बढ़ सकता है, साथ ही बियर की मिठास, हल्कापन और बनावट में बदलाव आता है.