Robots On Mars: मंगल ग्रह पर इंसानों से पहले रोबोट्स को बसाने का प्लान क्यों बना रहे एलन मस्क, क्या वहां वाकई बन सकती है इंसानों की कॉलोनी?

Robots On Mars: एलन मस्क का मंगल ग्रह का सपना सिर्फ दूसरे ग्रह पर इंसानी झंडा फहराने के बारे में नहीं है. इंसानों के लाल ग्रह पर कदम रखने से पहले मस्क चाहते हैं कि रोबोट पहले जाएं. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह और क्या सच में मंगल ग्रह पर इंसानों की कॉलोनी बन सकती है या नहीं.
मंगल ग्रह पर लगभग कोई सांस लेने लायक माहौल नहीं है. वहां काफी ज्यादा ठंड है जो माइंस 100 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाती है. इतना ही नहीं बल्कि वहां पर खतरनाक कॉस्मिक रेडिएशन भी है. इंसान ऐसी स्थिति में बिना सुरक्षा के ज्यादा समय तक जिंदा नहीं रह सकते. लेकिन रोबोट वेक्यूम जैसे माहौल में काम कर सकते हैं, रेडिएशन को भी झेल सकते हैं और साथ ही बिना खाना, पानी या फिर ऑक्सीजन के लगातार काम कर सकते हैं.
टेस्ला के ऑप्टिमस जैसे ह्यूमनॉइड रोबोट से ऐसी उम्मीद है कि वह बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे रहने की जगह, सोलर पावर सिस्टम, कम्युनिकेशन सेटअप और ऑक्सीजन बनाने वाली यूनिट बनाएंगे. यानी कि जब इंसान आखिरकार लैंड करेंगे तो उन्हें एक बंजर ग्रह नहीं मिलेगा.
मंगल ग्रह पर सबसे बड़ी चुनौती रिसोर्स की उपलब्धता है. रोबोट को जमीन के नीचे बर्फ खोजने का काम सौंपा जाएगा. जिसे पानी, सांस लेने लायक ऑक्सीजन और यहां तक की रॉकेट ईंधन में भी बदला जा सकता है.
मंगल ग्रह पर लैंडिंग करना उसके पतले माहौल और अंदाजा न लगाए जा सकने वाली सतह की वजह से काफी ज्यादा जोखिम भरा है. रोबोट को पहले भेज कर स्पेस एक्स स्टारशिप लैंडिंग, कार्गो डिप्लॉयमेंट और ऑटोनॉमस ऑपरेशन का टेस्ट कर सकता है. किसी भी नाकामी से मिशनों पर असर पड़ सकता है.
मस्क नहीं चाहते की मंगल ग्रह हमेशा के लिए पृथ्वी पर निर्भर रहे. रोबोट ऑटोमेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम, माइनिंग ऑपरेशन और रिपेयर यूनिट लगाने में मदद कर सकते हैं.
मस्क का ऐसा मानना है कि 2050 तक मंगल ग्रह पर 10 लाख लोगों का शहर हो सकता है. वैज्ञानिक अभी भी सावधान हैं. कम ग्रेविटी, ज्यादा रेडिएशन और इंसानी सेहत और प्रजनन पर अनजान असर गंभीर चिंताएं हैं. रोबोट सपने को ज्यादा रियलिस्टिक बना सकते हैं लेकिन मंगल ग्रह को इंसानों का परमानेंट घर बनाने में सालों नहीं बल्कि दशकों लगेंगे.