बिना पटाखे जले क्यों खराब हो रही दिल्ली की हवा? जानें प्रदूषण की वजह

Delhi Air Pollution: दिल्ली में बिना पटाखे जलाए भी शुष्क मौसम और बारिश न होने की वजह से हवा की गुणवत्ता खराब हो गई है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक रविवार को शाम 4:00 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 187 तक पहुंच गया था. इसी के साथ शनिवार को यह 159 और शुक्रवार को 90 था. वैसे तो दिवाली के आसपास पटाखे जलाने से प्रदूषण बढ़ सकता है लेकिन सवाल यह उठता है कि बिना प्रदूषण के भी दिल्ली में हवा क्यों खराब हो रही है? आइए जानते हैं.
बारिश न होने की वजह से धूल और दूसरे प्रदूषक तत्व हवा में ही बने रहते हैं. अक्टूबर और नवंबर के दौरान अक्सर हवा की रफ्तार कम हो जाती है. इससे प्रदूषित हवा आसानी से नहीं फैल पाती और दिल्ली के ऊपर प्रदूषक तत्व जमा होने लगते हैं.
सर्दियों के करीब आते ही ठंडी हवा जमीन के पास बैठ जाती है और अपने ऊपर गर्म हवा को रोक लेती है. तापमान की इस स्थिति की वजह से PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषक तत्व ऊपर नहीं आ पाते. इससे हानिकारक प्रदूषण जमीन के करीब जमा होने लगता है.
दिल्ली में वाहनों की बढ़ती संख्या स्थानीय वायु प्रदूषण में काफी योगदान देती है. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत सफर की रिपोर्ट में परिवहन को प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत बताया गया है.
सीएजी की एक रिपोर्ट में पुराने डीजल वाहनों और बसों को लेकर चिंता जताई गई है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र केंद्रों पर प्रदूषण की जांच सिर्फ कागजी औपचारिकता बनकर रह गई है.
सड़क पर चलने वाले वाहनों से उड़ने वाली धूल और बड़े निर्माण कार्यों के दौरान निकलने वाले बारीक कण हवा में मौजूद प्रदूषण को और भी बढ़ाते हैं. यह कण वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई को और भी ज्यादा खराब करने में योगदान देते हैं
खुली जगह पर कचरा और प्लास्टिक जलाने से वातावरण में धुआं और हानिकारक प्रदूषण तत्व फैलते हैं.
अक्टूबर और नवंबर के दौरान पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के किसान धान की प्रणाली को जलाते हैं. उत्तर पश्चिमी हवाओं के जरिए दिल्ली की तरफ आने वाला यह धुआं प्रदूषण के स्तर को बढ़ा देता है.
दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर राजधानी के बाहर से आने वाले प्रदूषण का भी असर पड़ता है. नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद और हापुड़ जैसे औद्योगिक केंद्रों में स्थित कारखाने और कोयले से चलने वाले थर्मल पावर प्लांट क्षेत्रीय प्रदूषण में योगदान देते हैं.