अंतरिक्ष में क्यों भेजी जा रही शराब, क्या है इसके पीछे की वजह?

अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक बेहद ही दिलचस्प और अनोखा प्रयोग होने जा रहा है, जहां इस बार किसी रॉकेट से वैज्ञानिक उपकरणों के साथ व्हिस्की को भी अंतरिक्ष भेजा जाएगा. आपने अब तक शराब को जमीन पर पुरानी होते सुना होगा, लेकिन अब वैज्ञानिक इसे पृथ्वी की कक्षा में रखकर पुराना यानी एज करने की तैयारी में हैं. इस अनूठे शोध का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि क्या अंतरिक्ष का माहौल और शून्य गुरुत्वाकर्षण व्हिस्की को मैच्योर करने की प्रक्रिया को तेजी से पूरा कर सकता है.
स्कॉटलैंड और जापान के विशेषज्ञ मिलकर इस प्रॉजेक्ट पर काम कर रहे हैं. अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले समय में दुनिया भर के शराब प्रेमियों को अंतरिक्ष के माहौल में तैयार एक एकदम नए और अलग स्वाद वाली 'स्पेस-एज्ड व्हिस्की' का स्वाद चखने को मिल सकता है.
किसी भी अच्छी व्हिस्की का स्वाद और उसकी खुशबू इस बात पर निर्भर करती है कि उसे कितने समय तक रखा गया है. आम तौर पर शराब तैयार होने के बाद उसे लंबे समय के लिए लकड़ी के पीपों या कांच के बर्तनों में जमा करके छोड़ दिया जाता है.
इस पूरी समय अवधि को एजिंग कहा जाता है, जिससे शराब का रंग गहरा होता है और उसका तीखापन कम होकर एक बेहतरीन स्वाद बनता है. अब तक यह सारा काम धरती पर ही होता रहा है, लेकिन अब वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को अंतरिक्ष के माहौल में आजमाकर एक नई खोज करना चाहते हैं.
इस अनोखे प्रयोग को अंजाम देने के लिए स्कॉटलैंड और जापान के इंजीनियरों ने हाथ मिलाया है. वे एक बेहद छोटा और आधुनिक सैटेलाइट तैयार कर रहे हैं, जिसे 'क्यूबसैट' नाम दिया गया है. इस मिशन का नाम 'स्पेस पफिन' रखा गया है.
सैटेलाइट के अंदर व्हिस्की के चुनिंदा सैंपल और उसकी मुख्य सामग्री रखी जाएगी. लकड़ी के पारंपरिक बैरल जैसा माहौल देने के लिए उसमें ओक की लकड़ी के बारीक टुकड़े भी मिलाए जाएंगे, ताकि अंतरिक्ष की परिस्थितियों में लकड़ी और शराब का आपस में सही रिएक्शन हो सके.
वैज्ञानिकों की योजना के अनुसार, इस छोटे क्यूबसैट सैटेलाइट को साल 2028 में अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. इसके लिए एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के सप्लाई मिशन का सहारा लिया जाएगा. सबसे पहले इसे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचाया जाएगा.
वहां पहुंचने के बाद, स्पेस स्टेशन के जापानी रिसर्च मॉड्यूल की मदद से इसे 5 साल के लंबे मिशन के लिए पृथ्वी की कक्षा में तैनात कर दिया जाएगा, जहां यह लगातार चक्कर काटेगा.
अंतरिक्ष में तैरता यह सैटेलाइट हर 90 मिनट में हमारी पृथ्वी की एक पूरी परिक्रमा करेगा. इस दौरान व्हिस्की को एक तरफ भीषण गर्मी और दूसरी तरफ जमा देने वाली कड़ाके की ठंड का बार-बार सामना करना पड़ेगा.
वैज्ञानिकों का मानना है कि तापमान में लगातार होने वाले इस भारी उतार-चढ़ाव से शराब के मैच्योर होने की रफ्तार काफी तेज हो जाएगी. प्रोजेक्ट के वैज्ञानिक की मानें तो अंतरिक्ष के इस अनोखे सफर के बाद व्हिस्की का स्वाद बहुत ही जबरदस्त, बोल्ड और बिल्कुल अलग होगा.
पांच सालों तक अंतरिक्ष में रहने के दौरान इस सैटेलाइट में लगे सेंसर व्हिस्की के रंग, रासायनिक बदलाव और गाढ़ेपन पर लगातार नजर रखेंगे. सारा डेटा तुरंत जमीन पर बने कंट्रोल सेंटर को डिजिटल रूप से भेजा जाएगा.
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस सैटेलाइट को वापस धरती पर नहीं लाया जाएगा, बल्कि केवल इसका डेटा ही वैज्ञानिकों को मिलेगा. भविष्य में वैज्ञानिक एक ऐसा सिस्टम तैयार करने का सपना देख रहे हैं, जिससे अंतरिक्ष में शराब बनाकर उसे सुरक्षित धरती पर लाकर बेचा जा सके.