एयरलेस टायर में ऐसा क्या, जो नहीं होता पंक्चर? क्या नॉर्मल टायर भी बन सकता है ऐसा

सड़क पर गाड़ी चलाते वक्त सबसे बड़ा डर टायर पंक्चर होने का होता है. सोचिए कि आपकी गाड़ी का टायर कभी पंक्चर ही न हो और उसमें आपको हवा भरने के झंझट से आजादी मिल जाए तो कितना अच्छा हो. ऑटोमोबाइल की दुनिया में यह कमाल एयरलेस टायर्स की वजह से संभव हो चुका है. तकनीकी भाषा में इसे नॉन न्यूमेटिक टायर्स भी कहते हैं. इसकी बनावट इतनी एडवांस होती है कि इसमें जरा भी हवा भरे बिना यह गाड़ियों का वजन उठा लेता है. चलिए जानें कि क्या नॉर्मल टायर्स भी ऐसे बन सकते हैं.
पारंपरिक टायरों को अपना गोल आकार बनाए रखने के लिए और गाड़ी के वजन संभालने के लिए अंदर भरी हुई हवा के दबाव जी जरूरत होती है. इसके उलट एयरलेस टायर्स में हवा भरने के लिए कोई इनर ट्यूब या एयर चैंबर नहीं होता है.
इस टायर के मुख्य हिस्से यानि व्हील, रिम और बाहरी रबर के बीच मधुमक्खी के छत्ते के जैसी मजबूत और बेहद लचीली रबर या राल से बने स्पोक्स का एक जाल लगा होता है. यह जालीदार संरचना ही गाड़ी के पूरे वजन को संभालती है, जिससे हवा की जरूरत खत्म हो जाती है.
जब सामान्य टायर के अंदर के अंदर कोई कील या नुकीली चीज चुभती है, तो हवा निकल जाती है और टायर पंक्चर हो जाता है. लेकिन एयरलेस टायर्स के मामले में ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता है. चूंकि इसमें हवा नहीं होती है इसलिए कुछ भी चुभने पर वह वस्तु खाली जगहों से होकर गुजरती है.
जब गाड़ी कि गड्ढे या किसी ऊबड़-खाबड़ सड़क से गुजरती है, तो इसके लचीले स्पोक्स मुड़कर झटके को अपने अंदर सोख लेते हैं और तुरंत वापस अपने पुराने आकार में आ जाते हैं. इससे टायर के काम करने की क्षमता पर कोई असर नहीं होता है.
कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या वे अपनी गाड़ी के नॉर्मल टायर को मैकेनिकली एयरलेस टायर्स में बदल सकते हैं? इसका सीधा जवाब है नहीं. सामान्य टायर्स और एयरलेस टायर्स की बुनियादी बनावट में फर्क होता है.
इसलिए नॉर्मल टायर्स को एयरलेस टायर्स में नहीं बदला जा सकता है. हालांकि आप अपने सामान्य ट्यूबलेस टायर्स को अपग्रेड करके काफी हद तक उसे पंक्चर-रोधी जरूर बना सकते हैं, जिसके लिए बाजार में कुछ विकल्प मौजूद हैं.
अपने साधारण टायर्स को पंक्चर से बचाने के लिए एंटी पंक्चर लिक्विड जेल का इस्तेमाल करके इसे टायर के अंदर डाल सकते हैं. जब भी कोई कील चुभती है तो यह जेल तुरंत उस छेद में जाकर जम जाता है और हवा को ब्लॉक कर देता है.
दूसरा ऑप्शन है रन-फ्लैट टायर्स का. इन टायरों की साइड की दीवारें काफी मजबूत होती हैं. अगर इस टायर की पूरी हवा निकल भी जाए तो भी यह पिचकता नहीं है और 50-80 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से गाड़ी को सुरक्षित वर्कशॉप तक ले जा सकता है.