अमेरिका में क्या है पानी की सप्लाई का सिस्टम, वहां भारत की तरह घरों की छतों पर टंकियां क्यों नहीं रखते लोग?

भारत के किसी भी शहर या गांव में घरों की छतों पर प्लास्टिक या कंक्रीट की बड़ी-बड़ी पानी की टंकियां दिखाई देना एक बेहद आम बात है. इसके विपरीत, जब हम अमेरिकी फिल्मों या तस्वीरों में वहां के रिहाइशी इलाकों को देखते हैं, तो मकानों की छतें पूरी तरह सपाट या ढलवा होती हैं, लेकिन उन पर कोई टंकी नजर नहीं आती. दोनों देशों के बीच पानी के इस बुनियादी ढांचे का यह अंतर केवल दिखावे का नहीं है, बल्कि इसके पीछे दोनों देशों की वॉटर सप्लाई इंजीनियरिंग, बिजली की उपलब्धता, भौगोलिक परिस्थितियां और मकान बनाने की तकनीक का एक बहुत बड़ा और गहरा इतिहास छिपा हुआ है.
भारत के अधिकांश शहरों में नगरपालिका द्वारा पानी की सप्लाई दिन में सिर्फ कुछ तय घंटों के लिए ही की जाती है. इसके अलावा, सरकारी पाइपलाइनों में पानी का दबाव इतना कम होता है कि वह बिना मोटर के मकान की ऊपरी मंजिलों तक नहीं पहुंच पाता. इसी वजह से भारतीय घरों में नीचे एक अंडरग्राउंड टैंक और छत पर ओवरहेड टैंक लगाना मजबूरी बन जाता है.
वहीं अमेरिका का म्यूनिसिपल वॉटर सिस्टम पूरी तरह अलग है. वहां के हर घर में साल के 365 दिन और 24 घंटे बेहद हाई प्रेशर के साथ पानी की निर्बाध सप्लाई की जाती है, जिससे टंकियों की जरूरत ही खत्म हो जाती है.
अमेरिकी वॉटर सिस्टम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वहां पानी सीधे मुख्य अंडरग्राउंड पाइप नेटवर्क से सीधे घरों के भीतर लगे नलों तक पहुंचता है. इस पूरे सिस्टम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि देश में बिजली कटौती होने या न होने का पानी के प्रेशर पर कोई असर नहीं पड़ता है.
बैकअप सिस्टम इतने मजबूत हैं कि मुख्य ग्रिड फेल होने पर भी पाइपलाइनों में दबाव हमेशा एक समान बना रहता है. यही वजह है कि अमेरिका में रहने वाले आम नागरिकों को अपने घरों में पानी का संचय करने के लिए किसी भी तरह का ओवरहेड टैंक लगाने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती.
अमेरिका का यह प्रेशराइज्ड वॉटर नेटवर्क आज का नहीं, बल्कि 100 साल से भी ज्यादा पुराना है. जैसे-जैसे वहां शहरों का विकास हुआ, अमेरिकी इंजीनियरों ने पूरे शहर के लिए एक सेंट्रलाइज्ड सिस्टम तैयार किया. इस सिस्टम के तहत पानी को बड़े-बड़े और शक्तिशाली पंपों की मदद से शहर के सबसे ऊंचे इलाकों, पहाड़ियों या विशाल सरकारी वॉटर टावरों में पहले ही स्टोर कर दिया जाता है.
वहां से गुरुत्वाकर्षण बल के जरिए पानी पूरे शहर की पाइपलाइनों में बेहद तेज रफ्तार और भारी दबाव के साथ खुद-ब-खुद दौड़ता है, जिससे हर घर को समान प्रेशर से पानी मिलता है.
अमेरिका में पानी की गुणवत्ता और उसकी सप्लाई निरंतर बनाए रखने को लेकर बेहद कड़े और सख्त सरकारी नियम लागू हैं. वहां भारत की तरह कभी-कभी पानी आने जैसी समस्या लगभग शून्य है.
लगातार 24 घंटे पानी का बहाव रहने का एक बड़ा फायदा यह भी होता है कि पाइपलाइनों के भीतर वैक्यूम या खाली जगह नहीं बनती, जिससे जमीन के अंदर की गंदगी या प्रदूषित पानी मुख्य सप्लाई में नहीं घुस पाता. भारत में समय-समय पर पानी आने की वजह से पाइप खाली हो जाते हैं और उनमें गंदा पानी रिसने का खतरा रहता है, जिससे बचने के लिए भी घरेलू टैंक जरूरी होते हैं.
अमेरिकी घरों की छतों पर भारी-भरकम टैंक न होने के अपने कई बड़े और अनोखे फायदे भी हैं. पानी का वजन न होने से मकान की पूरी छत हमेशा हल्की रहती है, जिससे भूकंप या भयंकर चक्रवाती तूफानों के समय घरों के ढहने का खतरा बहुत कम हो जाता है.
इसके अलावा, मकान मालिकों को टंकियों की समय-समय पर सफाई करने या उनके रख-रखाव के झंझट से पूरी तरह मुक्ति मिल जाती है. छत पर पानी लीक होने का डर न रहने से घरों की उम्र भी लंबी होती है और सीलन जैसी गंभीर समस्याएं पैदा नहीं होतीं.
अमेरिकी घरों की छत पर टैंक न होने के पीछे वहां की निर्माण तकनीक भी एक बहुत बड़ी वजह है. भारत में जहां अमूमन घर भारी ईंट, सीमेंट और कंक्रीट से बनाए जाते हैं, वहीं अमेरिका में ज्यादातर रिहाइशी मकान लकड़ी के फ्रेम से तैयार किए जाते हैं. ये मकान बेहद हल्के और अंदर से इंसुलेटेड होते हैं.
लकड़ी से बने इन ढांचों के ऊपर हजारों लीटर पानी से भरी भारी-भरकम कंक्रीट या प्लास्टिक की टंकी को रखना न सिर्फ बेहद खर्चीला सौदा साबित हो सकता है, बल्कि यह सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद खतरनाक और पूरी तरह से अनावश्यक होता है.
अगर दोनों देशों की तुलना की जाए, तो भारत जैसे विशाल आबादी और सीमित संसाधनों वाले देश में ओवरहेड टैंक करोड़ों लोगों के लिए एक जीवन रक्षक की तरह काम करते हैं, जो पानी के संकट को टालते हैं. वहीं अमेरिका ने शुरुआत से ही अपने इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश करके इस समस्या का जड़ से समाधान खोज लिया था.
हालांकि, अब भारत के कई आधुनिक शहरों और नई सोसायटियों में भी 24/7 हाई प्रेशर वॉटर सिस्टम की ओर कदम बढ़ाए जा रहे हैं. कुल मिलाकर, हमारी पानी की टंकियां हमारी जरूरत का हिस्सा हैं, तो उनकी खाली छतें उनकी सरकारी सुविधाओं का प्रतीक हैं.