शराब पीने के बाद क्यों होता है हैंगओवर, जानिए क्या कहता है साइंस?
शराब शरीर में जाकर पहले एथेनॉल के रूप में रहती है. लीवर इसे तोड़कर एसीटैल्डिहाइड नाम के जहरीले केमिकल में बदलता है. यही केमिकल सिरदर्द, कमजोरी और भारीपन बढ़ाता है. बाद में यह और टूटकर कम हानिकारक तत्वों में बदलता है, लेकिन तब तक शरीर पर असर दिखने लगता है.
शराब बार-बार पेशाब लगने की वजह बनती है. इससे शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है. इसे डिहाइड्रेशन कहा जाता है. शरीर में पानी कम होने से सिरदर्द, मुंह सूखना, चक्कर और थकान बढ़ जाती है.
इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी से मांसपेशियों में कमजोरी और दिल की धड़कन में बदलाव भी महसूस हो सकता है, इसलिए हैंगओवर के दौरान शरीर सुस्त और कमजोर लगता है.
कई लोग मानते हैं कि शराब पीने से अच्छी नींद आती है, लेकिन शोध बताते हैं कि शराब नींद के गहरे चरण तक पहुंचने नहीं देती. शुरुआत में नींद जल्दी आ सकती है, लेकिन रात में बार-बार नींद टूटती है.
डीप स्लीप पूरी न होने से सुबह उठने पर दिमाग ताजा महसूस नहीं करता है. ध्यान लगाने में दिक्कत और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है. कुछ लोगों में शराब के बाद ब्लड शुगर गिर सकता है. इससे कमजोरी, पसीना, कंपकंपी और चक्कर आ सकते हैं. दिमाग में हल्की सूजन और केमिकल बदलाव भी होते हैं, जिससे तेज रोशनी और आवाज ज्यादा परेशान करती है.
खाली पेट शराब पीने से यह असर और तेज हो सकता है, क्योंकि तब शराब जल्दी खून में मिलती है और उसका असर ज्यादा होता है. ज्यादा मात्रा में शराब पीना, अलग-अलग तरह की ड्रिंक मिलाकर पीना, खाली पेट पीना और कम पानी पीना हैंगओवर का खतरा बढ़ाते हैं. शरीर की सहनशक्ति भी व्यक्ति-व्यक्ति पर अलग होती है.
महिलाओं और कम वजन वाले लोगों में शराब का असर जल्दी और ज्यादा हो सकता है. उम्र बढ़ने के साथ भी शरीर शराब को धीरे तोड़ता है, जिससे अगली सुबह परेशानी ज्यादा हो सकती है.