शिमला, मनाली जैसे हर हिल स्टेशन पर ही क्यों होते हैं मॉल रोड? जानें क्या है वजह

पहाड़ों पर घूमना किसे पसंद नहीं होता है. अग आप भी कभी शिमला, मनाली, मसूरी या फिर नैनीताल गए होंगे तो आपने वहां की मॉल रोड जरूर घूमी होगी. ये सड़कें सिर्फ बाजार नहीं होती हैं, बल्कि लोगों की जिंदगी का एक एक्सपीरियंस होती हैं जिसको वो जीना चाहता है. क्या आपने कभी सोचा है कि इन सड़कों को मॉल रोड ही क्यों कहते हैं और ये किसलिए बनवाई गई थीं.
आज के वक्त में हमलोग मॉल का मतलब सिर्फ बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल से ही जानते हैं. लेकिन अंग्रेजों के जमाने में मॉल का मतलब कुछ और हुआ करता था.
उस वक्त मॉल शब्द का इस्तेमाल एक ऐसे खुले-खुले चौड़े रास्ते के लिए होता था, जो कि खासतौर से टहलने और मेलजोल के लिए बनाया जाता था.
अंग्रेज गर्मियों में शिमला, मसूरी और दार्जलिंग जैसी जगहों पर जाते थे. यहां पर वे शाम के वक्त घूमते, टहलते और बातें करते थे. ये सड़कें बाद में मॉल रोड कही जानें लगीं.
जब देश से अंग्रेज चले गए तब इन सड़कों ने आम लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचना शुरू कर दिया. यहां पर स्थानीय हस्तशिल्प, खाने-पीने की चीजें और कपड़े भी मिलने लगे.
धीरे-धीरे ये मॉल रोड सड़क की पहचान बन गई. मसूरी, शिमला, नैनीताल, दार्जलिंग में भी मॉल रोड है. ये सड़कें सैलानियों का दिल जीत लेती हैं.
अब मॉल रोड सिर्फ बाजार नहीं रह गए, बल्कि ये पर्यटन, संस्कृति, इतिहास और जीवनशैली का मेल बन चुके हैं.
यहां पर घूमना एक अलग एहसास देता है. ये सड़कें स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का जरिया और पर्यटकों के लिए यादगार अनुभव हैं.