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रात के अंधेरे में शराब पीना क्यों बना ग्लोबल ट्रेंड, क्या रात में ही चढ़ता है ज्यादा नशा?

निधि पाल   |  21 Apr 2026 09:51 AM (IST)
रात के अंधेरे में शराब पीना क्यों बना ग्लोबल ट्रेंड, क्या रात में ही चढ़ता है ज्यादा नशा?

क्या आपने गौर किया है कि शराब का जिक्र आते ही हमारे दिमाग में शाम की ढलती रोशनी और रात का अंधेरा क्यों उभरता है? क्यों दुनिया भर में दोपहर की धूप में शराब पीना एक अजीब सा सामाजिक अपराध जैसा लगता है? यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक गहरी सामाजिक और मनोवैज्ञानिक बुनावट है. रात के अंधेरे और शराब के बीच का यह रिश्ता महज एक ट्रेंड नहीं, बल्कि थकान, सामाजिक शर्म और हमारे मस्तिष्क की जैविक घड़ी का एक जटिल मेल है.

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भारतीय परिवेश में शराब पीने के लिए रात के समय को चुनने के पीछे सबसे बड़ा कारण सामाजिक शर्म है. हमारे पारिवारिक मूल्य ऐसे हैं कि दिन के उजाले में या परिवार के सामने शराब पीना आज भी एक वर्जित कार्य माना जाता है.

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काम का भारी बोझ और दिन भर की भागदौड़ के बाद, रात का समय थकान उतारने का जरिया बन जाता है. ब्रिटिश काल में कोलकाता में जब पहली बार व्यावसायिक शराब की दुकानें खुलीं, तब से लेकर आज तक, शराब का सेवन धीरे-धीरे एक शाम की रस्म में बदल गया, ताकि इसे एक जिम्मेदार और पेशेवर छवि के साथ जोड़ा जा सके.

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भारत में 8 पीएम जैसे व्हिस्की ब्रांड के नाम इस बात का पुख्ता सबूत हैं कि रात के आठ बजे का समय लोगों के दिमाग में गहराई से दर्ज है. यह वह समय है जब अधिकांश लोग काम से घर लौट आते हैं और अपने सामाजिक जीवन का आनंद लेना शुरू करते हैं. समाज में दिन में पीने को आलस्य या गंभीर लत के तौर पर देखा जाता है, जबकि शाम को पीना स्ट्रेस रिलीज या बॉन्डिंग का हिस्सा माना जाता है.

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इसी कारण लोग स्वाभाविक रूप से रात को ही शराब के प्रति आकर्षित होते हैं. रात के समय शराब का नशा ज्यादा प्रभावी महसूस होने के पीछे वैज्ञानिक कारण सर्कैडियन रिदम (जैविक घड़ी) है. शोध बताते हैं कि शाम के वक्त हमारा मस्तिष्क रिवार्ड सिस्टम (पुरस्कार प्रणाली) के प्रति ज्यादा संवेदनशील होता है.

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इस समय शराब पीने से मिलने वाला रिलैक्सेशन मस्तिष्क में एक गहरा प्रभाव छोड़ता है, जो दिन के समय नहीं मिल पाता है. इसीलिए, जैविक रूप से भी हमारा शरीर और दिमाग शाम ढलते ही शराब की ओर झुकने लगता है, जो इसे एक ग्लोबल आदत बना देता है.

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केवल भारत ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन, आइसलैंड और चेक गणराज्य जैसे देशों में भी शराब शाम का ही हिस्सा है. वहां सुबह या दोपहर में पीने को सामाजिक रूप से अस्वीकार्य माना जाता है. जापान में तो नोमिकाई जैसी अनोखी परंपरा है, जहां सहकर्मी काम खत्म करने के बाद शाम को साथ बैठकर पीते हैं.

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यहां का मुख्य उद्देश्य प्रोफेशनल तनाव को खत्म कर आपसी रिश्ते सुधारना होता है. स्पष्ट है कि रात में शराब पीना केवल एक नशा नहीं, बल्कि आधुनिक कामकाजी संस्कृति का एक अभिन्न अंग बन चुका है.

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