Nicotine Craving: सिगरेट का कश जाते ही क्यों मिट जाती है तलब, कैसे काम करता है निकोटीन?
जब आप सिगरेट का धुआं अंदर लेते हैं तो निकोटिन फेफड़ों से खून में जाता है और सिर्फ 7 से 10 सेकंड के अंदर दिमाग तक पहुंच जाता है. यह स्पीड कई इंजेक्टेड ड्रग्स से भी ज्यादा तेज है. यही वजह है कि एक कश के बाद लगभग तुरंत ही आराम महसूस हो जाता है.
दिमाग में पहुंचने के बाद निकोटिन निकोटीनिक एसिटाइलकोलाइन रिसेप्टर से जुड़ जाता है. यह रिसेप्टर स्विच की तरह काम करते हैं और केमिकल सिग्नल को ट्रिगर करते हैं. इन्हें दिमाग जरूरी समझता है.
निकोटीन का सबसे बड़ा असर डोपामिन का रिलीज होना है. यह दिमाग का अच्छा महसूस करने वाला केमिकल होता है. यही वजह है कि सिगरेट पीने के बाद चिंता और चिड़चिड़ापन अचानक कम हो जाता है.
डोपामिन का यह उछाल एक इनाम के तौर पर रजिस्टर्ड होता है. दिमाग सीख जाता है कि एक कश का मतलब आराम है. इस वजह से डोपामिन रिलीज होते ही तलब खत्म हो जाती है.
निकोटीन थोड़े समय के लिए अलर्टनेस और कंसंट्रेशन को बढ़ाता है और महसूस होने वाले स्ट्रेस को कम करता है. इससे यह भ्रम पैदा होता है कि सिगरेट ने समस्या को ठीक कर दिया है.
जैसे-जैसे निकोटिन का लेवल कम होता है इसका असर जल्दी खत्म हो जाता है. जब डोपामिन कम होता है तो दिमाग इसे फिर से मांगता है. इसी को तलब कहते हैं.