चौकोर या त्रिकोणीय क्यों नहीं होता इंद्रधनुष, इसकी गोल शेप के पीछे कैसे काम करता है विज्ञान?

बारिश की फुहारों को बीच जब अचानक धूप निकलती है, तो नीले आसमान पर बिखरे सतरंगी इंद्रधनुष को देखकर हर कोई खुश हो जाता है. कुदरत के इस खूबसूरत नजारे को देखने के बाद क्या आपने कभी यह सोचा है कि यह सतरंगी छटा हमेशा गोल आकार में क्यों दिखाई देती है? क्यों इसका आकार चौकोर या त्रिकोणीय नहीं होता है. चलिए इसके पीछे का विज्ञान समझें.
आसमान में इंद्रधनुष के उभरने के लिए मुख्य रूप से तीन चीजों का साथ होना बेहद जरूरी है- सूरज की तेज रोशनी, हवा में तैरती पानी की नन्हीं बूंदें और प्रकाश की किरणों का एक खास एंगल.
जब सूर्य की किरणें सामने मौजूद पानी की गोल बूंदों के भीतर प्रवेश करती हैं, तो वे अंदर जाते ही मुड़ जाती हैं. बूंद के पिछले हिस्से से टकराकर जब यह रोशनी वापस निकलती है, तो वह बिल्कुल 42 डिग्री के कोण पर झुककर सात अलग-अलग रंगों- बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल में पूरी तरह बिखर जाती है.
इंद्रधनुष का आकार कभी भी सीधा या चौकोर इसलिए नहीं हो सकता है क्योंकि 42 डिग्री का यह खास कोण पानी की गोल बूंदों के चारों तरफ एक समान गोलाकार आकृति का निर्माण करता है. जब सूरज हमारी पीठ के पीछे होता है और पानी की बूंदे सामने होती हैं, तो हमारी आंखों तक पहुंचने वाली रंगीन रोशनी एक शंकु या गोले का रूप ले लेती है.
हालांकि, हमें जमीन पर खड़े होने के कारण सिर्फ इसका ऊपरी आधा हिस्सा ही धनुष की तरह से मुड़ा हुआ दिखाई देता है, क्योंकि बाकी का आधा हिस्सा नीचे धरती की ओट में छिप जाता है.
कुदरत के इस रंगीन नजारे को देखने के लिए मौसम की दो खास शर्तों का पूरा होना बेहद जरूरी माना जाता है. पहली शर्त यह कि आसमान के एक हिस्से में पानी की बूंदें मौजूद हों और ठीक उसी समय सूरज दूसरी तरफ चमक रहा हो.
यही वजह है कि मानसून के दिनों में जब तेज बारिश के बाद अचानक बादल छंटने लगते हैं और तेज धूप निकलती है, तब आसमान में यह सतरंगी नजारा सबसे साफ और चटक रंगों के साथ दिखाई देता है.
जब आसमान में दो इंद्रधनुष दिखाई देते हैं तो यह नजारा तब बनता है जब सूरज की रोशनी पानी की बूंद के भीतर सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि दो बार टकराकर परावर्तित होती है. इस प्रक्रिया में मुख्य इंद्रधनुष के ठीक ऊपर एक और हल्का धुंधला इंद्रधनुष बन जाता है.