रोते समय नाक बहने का क्या है कनेक्शन? समझिए शरीर का यह अनोखा सिस्टम

हम जब रोते हैं तो सिर्फ आंखों से ही नहीं, नाक से भी पानी बहने लगता है. यह आम बात है, लेकिन इसके पीछे शरीर का एक खास मैकेनिज्म काम करता है. आंसू और नाक के बीच सीधा कनेक्शन होता है, जो ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं. आंखों में बनने वाले आंसू सिर्फ बाहर नहीं निकलते, बल्कि उनका रास्ता नाक तक भी जाता है. यही वजह है कि रोते समय नाक भी बहने लगती है.
रोना सिर्फ इमोशन नहीं, बल्कि शरीर की एक जरूरी प्रक्रिया है. हमारी आंखों में मौजूद लैक्रिमल ग्लैंड लगातार आंसू बनाती रहती है. ये आंसू आंखों को नम रखते हैं, धूल हटाते हैं और संक्रमण से बचाते हैं. जब हम ज्यादा रोते हैं, तो आंसुओं की मात्रा अचानक बढ़ जाती है और वे आंखों से बाहर बहने लगते हैं.
आंख और नाक के बीच एक पतली नली होती है, जिसे नासोलैक्रिमल डक्ट कहा जाता है. आंसू आंख के कोने से इसी नली के जरिए नाक तक पहुंचते हैं. आमतौर पर यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है, इसलिए हमें महसूस नहीं होता.
लेकिन जब आंसू ज्यादा बनते हैं, तो यही रास्ता तेजी से काम करने लगता है. जब हम रोते हैं, तो आंसुओं की मात्रा इतनी बढ़ जाती है कि नासोलैक्रिमल डक्ट पूरी तरह भर जाती है.
इसके बाद अतिरिक्त आंसू सीधे नाक के अंदर जाने लगते हैं. यही कारण है कि नाक में अचानक पानी जमा होने लगता है और बहने लगता है.
नाक के अंदर म्यूकस मेम्ब्रेन यानी एक परत होती है, जो नमी बनाए रखने का काम करती है. जब आंसू नाक में पहुंचते हैं, तो यह परत उन्हें पतला कर देती है और बाहर निकालने लगती है. इसी वजह से नाक से साफ पानी जैसा तरल बहता है, जिसे हम नाक बहना कहते हैं.
रोने के दौरान आंसू लगातार बनते रहते हैं, इसलिए नाक में जाने वाला तरल भी लगातार बढ़ता रहता है. जब तक आंसू बनते रहेंगे, तब तक नाक बहती रहेगी. जैसे ही रोना बंद होता है, आंसुओं का उत्पादन कम हो जाता है और नाक बहना भी धीरे-धीरे रुक जाता है.
नाक बहना सिर्फ दुख में रोने से ही नहीं होता. प्याज काटते समय, धूल लगने पर या तेज हवा में भी आंसू बनते हैं. इन सभी स्थितियों में भी वही प्रक्रिया काम करती है और आंसू नाक तक पहुंच जाते हैं, जिससे नाक बहने लगती है.