Lightning Science: जिग-जैग पैटर्न में ही क्यों कड़कती है बिजली, जानें क्या है इसके पीछे की वजह
हवा आमतौर पर बिजली के बहाव को रोकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह एक खराब कंडक्टर है. जब बिजली बनती है तो यह उन जगहों की तलाश करती है जहां बिजली ज्यादा आसानी से गुजर सके. जैसे कि ज्यादा नमी, धूल या आयनाइज्ड पार्टिकल्स वाली जगहें. अब क्योंकि ये कंडक्टिव जगहें एक जैसी नहीं बिखरी होती, इस वजह से बिजली लगातार दिशा बदलती रहती है. यही इसके जिग-जैग रूप की वजह है.
बिजली बादल से जमीन तक एक ही लगातार गति में नहीं जाती. इसके बजाय यह छोटी छलांगों में चलती है. इन्हें स्टेप्ड लीडर्स कहते हैं. हर छलांग लगभग 30 से पहले 50 मीटर लंबी होती है. हर कदम के बाद बिजली थोड़ी देर रूकती है और अगला सबसे आसान रास्ता ढूंढती है.
आमतौर पर हवा बिजली को रोकी है, लेकिन जब बादल में बड़ा इलेक्ट्रिक चार्ज जमा हो जाता है तो यह अपने आप नीचे की हवा को आयनाइज कर देता है. आयनाइजेशन का मतलब है कि हवा के कण इलेक्ट्रिकली चार्ज हो जाते हैं. इससे वे बिजली कंडक्ट कर पाते हैं. क्योंकि बिजली इन आयनाइज्ड चैनलों से गुजरती है और आयनाइजेशन का कोई एक रूप नहीं होता, इस वजह से रास्ता टेढ़ा-मेढ़ा हो जाता है.
एटमॉस्फियर में एक जैसा तापमान, प्रेशर या फिर घनत्व नहीं होता. कुछ इलाकों में कम घनत्व या ज्यादा नमी की वजह से कम रुकावट होती है. बिजली स्वाभाविक रूप से इन आसान रास्तों की तरफ झुकती है और जमीन तक पहुंचने से पहले कई बार अपना रास्ता बदलती है.
हवा में मौजूद धूल, पानी की बूंद और प्रदूषण जैसे छोटे कण बिजली को ज्यादा आसानी से चलने में मदद करते हैं. बिजली इन कणों की तरफ खिंचती है क्योंकि यह कंडक्टिविटी को बेहतर बनाते हैं.
जिग-जैग रास्ता सबसे पहले स्टेप्ड लीडर से बनता है. यह इंसान की आंखों को दिखाई नहीं देता. एक बार जब रास्ता जमीन से जुड़ जाता है तो उसमें से एक तेज बिजली का करंट बहता है. इससे वह तेज बिजली चमकती है जो हम देखते हैं.