Abandoned Houses: खंडहर या बंद पड़े मकान से क्यों आती हैं अजीब आवाजें, क्या सच में होते हैं भूत?

Abandoned Houses: खंडहर, खाली हवेलियां और वीरान इमारतें लंबे समय से भूत की कहानियां और अलौकिक कहानियों से जुड़ी हुई हैं. अक्सर ऐसा कहा जाता है कि इन इलाकों में अजीब आवाजें, चलती फिरती परछाइयां और भयानक माहौल होता है. हालांकि विज्ञान काफी अलग तस्वीर पेश करता है. आइए जानते हैं कि इस तरह के किस्से महज अंधविश्वास हैं या फिर उनके पीछे कुछ सच्चाई है.
जब हवा टूटी खिड़कियों, गलियों या फिर टूटी फूटी संरचनाओं से होकर गुजरती है तो पुरानी इमारतें अक्सर लो फ्रिकवेंसी वाली ध्वनि तरंगें उत्पन्न करती है, जिन्हें इन्फ्रासाऊंड के रूप में जाना जाता है. हालांकि मनुष्य इन फ्रिकवेंसी को सुन नहीं सकते लेकिन वह चिंता, बेचैनी, चक्कर आना और यहां तक कि किसी के पास होने की अनुभूति भी पैदा कर सकते हैं.
दीवारें, लकड़ी के बीम, धातु के पाइप और कंक्रीट की सतह दिन में गर्मी की वजह से फैलते हैं और रात में तापमान गिरने पर सिकुड़ जाती हैं. इस प्रक्रिया से चटकने और खटखटाने जैसी आवाजें पैदा होती हैं.
खंडहर इमारत में आमतौर पर खराब वेंटीलेशन और क्षतिग्रस्त संरचनाएं होती हैं. जब तेज हवाएं अचानक दबाव अंतर पैदा करती है तो दरवाजे पटक सकते हैं, खिड़कियां चरमरा सकती हैं और ढीली वस्तुएं अपने आप हिल सकती हैं. इन्हें अक्सर असामान्य गतिविधि समझ लिया जाता है.
खंडहर अक्सर चमगादड़ों, गिलहरियों, कीड़ों और आवारा बिल्लियों के लिए आश्रय स्थल बन जाते हैं. उनकी हरकतें, खरोंचने, लड़ने या घोंसला बनाने की गतिविधि खाली कमरों और दालानों में गूंजती हैं. इससे ऐसी आवाज पैदा होती है जो भयानक और अजीब लग सकती है.
वैज्ञानिक इस घटना को पैरीडोलिया कहते हैं. मंद प्रकाश या फिर अंधेरे में इंसानी दिमाग परिचित पैटर्न और आकृतियों की पहचान करने की कोशिश करता है. परछाइयां, लटकते कपड़े, पेड़ की शाखाएं या फिर टूटी-फूटी दीवारें मानव आकृतियों के समान दिखाई दे सकती हैं. इससे लोगों को विश्वास हो जाता है कि उन्होंने भूत देखा है.
मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि डर धारणा को प्रभावित करता है. जब लोग किसी ऐसी जगह में जाते हैं जिसे पहले से ही भूतिया माना जाता है तो उनका दिमाग काफी ज्यादा सतर्क हो जाता है. तनाव, चिंता, नींद की कमी और अंधेरा मतिभ्रम का कारण बन सकता है.