Punjabi Wedding: पंजाब की शादियों में दुल्हन को क्यों पहनाया जाता था चूड़ा, जानें क्या है इसका इतिहास?

Punjabi Wedding: पंजाबी शादियों में दुल्हन के लाल चूड़े सिर्फ सजावटी गहनों से कहीं ज्यादा होते हैं. वे भावना, परंपरा और एक मजबूत सांस्कृतिक बदलाव को दिखाते हैं. आइए जानते हैं कि पंजाब की शादियों में दुल्हन को चूड़ा क्यों पहनाया जाता है और इसका क्या इतिहास है.
पारंपरिक रूप से चूड़ा दुल्हन के मामा और मौसी तोहफे में देते हैं. यह इशारा इस बात का प्रतीक है कि दुल्हन अपने मायके के प्यार, सुरक्षा और आशीर्वाद के साथ अपने मायके से जाती है.
लाल और हाथी दांत रंग की चूड़ियां यूं ही नहीं चुनी जाती. लाल रंग प्यार, ताकत और शादीशुदा जिंदगी की खुशी दिखाता है. वहीं सफेद रंग पवित्रता और नई शुरुआत का प्रतीक है. साथ में यह दुल्हन के आने वाले घर के लिए फर्टिलिटी, खुशहाली और अच्छी किस्मत की निशानी है.
पहले के जमाने में चूड़ा इस बात का पब्लिक संकेत होता था कि औरत ने हाल ही में शादी की है. इससे समाज को उसकी नई हैसियत पहचानने में और उसके साथ उसी हिसाब से पेश आने में मदद मिलती थी. पारंपरिक तौर पर नई दुल्हन से तुरंत घर के भारी काम करने की उम्मीद नहीं की जाती थी.
कई लोगों का ऐसा मानना है कि चूड़ा पति-पत्नी के बीच के रिश्ते को मजबूत करता है. ऐसा भी माना जाता है कि यह कपल को नेगेटिव एनर्जी या फिर बुरे आसार से बचाता है.
शादी की सुबह चूड़ा चढ़ाने की एक रस्म होती है. चूड़ियों को दूध और गुलाब की पंखुड़ियों से शुद्ध किया जाता है. इसके बाद मामा औपचारिक रूप से दुल्हन की कलाई पर चूड़ा पहनाते हैं. रस्म के बाद दुल्हन पारंपरिक रूप से तुरंत चूड़ियों को नहीं देखती. जब तक वह पूरी तरह से तैयार नहीं हो जाती तब तक उन्हें अक्सर एक सफेद कपड़े से ढक दिया जाता है.
पहले दुल्हन पूरे 1 साल तक चूड़ा पहनती थी. आजकल आमतौर पर इसे 40 से 45 दिनों तक पहना जाता है. चूड़ा उतारना भी एक रस्म होती है. एक छोटी सी पूजा की जाती है और पारंपरिक रूप से चूड़ियों को बहते पानी में विसर्जित कर दिया जाता है.