Cows Wear Bells: इस देश में गायों के गले में बंधी होती है घंटी, जानें क्या है इसके पीछे की वजह?
अल्पाइन इलाकों में गायें आमतौर पर बड़े पहाड़ी चरागाहों में आजादी से चरती हैं. यहां कोहरा, घने जंगल और उबड़ खाबड़ जमीन की वजह से जानवरों को देखकर पहचानना मुश्किल होता है. गाय के गले में बंधी घंटी से लगातार आवाज आती है. इसकी मदद से किसान उनकी लोकेशन को ट्रैक कर सकते हैं.
गाय की घंटियां झुंड के तालमेल को बनाए रखने में भी मदद करती हैं. आमतौर पर ग्रुप में सबसे आगे या फिर सबसे ज्यादा वजन वाली गाय सबसे बड़ी और भारी घंटी पहनती है. दूसरी गाय चरते समय अपने आप इस आवाज के पीछे-पीछे चलती हैं.
गाय की घंटी की आवाज खतरे का इशारा भी दे सकती है. अगर कोई गाय अचानक भागती है, फंस जाती है या फिर अजीब तरह से चलती है तो घंटी की आवाज में काफी बदलाव आ जाता है. किसान इस गड़बड़ी को पहचान कर जानवर को बचा सकते हैं.
हर गाय की घंटी उसके साइज, वजन और मटीरियल के आधार पर थोड़ी अलग आवाज निकालती है. जो किसान अपने झुंड को अच्छी तरह जानते हैं, वे अक्सर सिर्फ उनकी घंटियों की आवाज सुनकर खास गायों को पहचान सकते हैं.
दूर पहाड़ी इलाकों में गायों का सामना भेड़ियों या फिर भालू जैसे शिकारियों से हो सकता है. घंटियों की तेज और लगातार आवाज जंगली जानवरों को झुंड के पास आने से रोक सकती है. इसी तरह पहाड़ी रास्तों से गुजरने वाले हाइकर्स और टूरिस्ट घंटियों की आवाज सुन सकते हैं और उन्हें पता चल जाता है कि मवेशी आसपास हैं
स्विट्जरलैंड में गाय की घंटियां ना सिर्फ काम की चीज हैं बल्कि देश की संस्कृति का भी अहम हिस्सा हैं. अल्पाबजुग त्योहार जैसे पारंपरिक मौकों पर पहाड़ों में गर्मियों में चरने से लौट रही गायों को फूलों और हाथ से बनी बड़ी घंटियों से सजाया जाता है. इन्हें ट्राइकलेन कहा जाता है.