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Interesting Banking Facts: 4 अंकों का ही क्यों होता है एटीएम का पिन? दिलचस्प है इसके पीछे की कहानी

एबीपी लाइव   |  10 Jul 2026 06:05 AM (IST)
Interesting Banking Facts: 4 अंकों का ही क्यों होता है एटीएम का पिन? दिलचस्प है इसके पीछे की कहानी

4 अंकों का ही क्यों होता है एटीएम का पिन?

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बता दें कि दुनिया का पहला एटीएम स्कॉटलैंड के जॉन शेफर्ड-बैरन ने बनाया था, जिसे 27 जून 1967 को लंदन के एनफील्ड इलाके में बार्कलेज बैंक की एक शाखा के बाहर लगाया गया था. कहा जाता है कि शेफर्ड-बैरन को यह आइडिया चॉकलेट बेचने वाली वेंडिंग मशीन को देखकर आया था. एक दिन बैंक बंद होने की वजह से वे पैसे नहीं निकाल पाए थे, तभी उन्हें ख्याल आया कि जैसे मशीन से चॉकलेट निकलती है, वैसे ही एक मशीन से पैसे भी निकाले जा सकते हैं.

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जब शेफर्ड-बैरन ने यह मशीन बनाई, तो उन्हें एक ऐसी व्यवस्था की जरूरत थी जिससे मशीन यह पहचान सके कि पैसे निकालने वाला असली ग्राहक ही है. इसके लिए उन्होंने पर्सनल आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी पिन का आइडिया सोचा. चूंकि शेफर्ड-बैरन खुद सेना में रह चुके थे, इसलिए शुरुआत में उन्होंने अपने आर्मी नंबर की तरह 6 अंकों का पिन रखने की सोची, ताकि सुरक्षा ज्यादा मजबूत रहे. उन्हें लगा कि जितने ज्यादा अंक होंगे, पिन उतना ही सुरक्षित रहेगा और कोई उसे आसानी से नहीं तोड़ पाएगा.

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लेकिन जब शेफर्ड-बैरन ने यह 6 अंकों वाला पिन अपनी पत्नी कैरोलिन को याद कराने की कोशिश की, तो उन्हें एक दिलचस्प समस्या का सामना करना पड़ा. कैरोलिन ने उन्हें बताया कि वे आसानी से सिर्फ 4 अंक ही याद रख पाती हैं, इससे ज्यादा अंकों को याद रखना उनके लिए मुश्किल हो जाता है. पत्नी की इस बात को गंभीरता से लेते हुए शेफर्ड-बैरन ने अपना पूरा प्लान बदल दिया और पिन को 6 अंकों की जगह 4 अंकों का बना दिया.

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शेफर्ड-बैरन के इस फैसले ने आगे चलकर पूरी दुनिया के बैंकिंग सिस्टम को प्रभावित किया. जैसे-जैसे दुनियाभर में एटीएम मशीनों का इस्तेमाल बढ़ता गया, वैसे-वैसे 4 अंकों का पिन एक तरह से पूरी दुनिया में मशहूर हो गया.

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हालांकि 4 अंकों का पिन याद रखने में आसान जरूर है, लेकिन सुरक्षा के नजरिए से देखें तो यह उतना मजबूत नहीं माना जाता. 4 अंकों के पिन में केवल 10 हजार तरह के मुमकिन कॉम्बिनेशन बनते हैं, यानी 0000 से लेकर 9999 तक. अगर पिन 6 अंकों का होता, तो यह संख्या लाखों में पहुंच जाती और पिन को तोड़ना और भी मुश्किल हो जाता.

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लेकिन इसके बावजूद बैंकों ने सुविधा को ज्यादा तरजीह दी, क्योंकि एटीएम में गलत पिन डालने पर सिर्फ तीन मौके ही मिलते हैं, जिसके बाद कार्ड ब्लॉक हो जाता है. यही वजह है कि 4 अंकों का पिन होने के बावजूद इसे सुरक्षित माना जाता है. आज भले ही बैंकिंग सिस्टम काफी आधुनिक हो गया हो और डिजिटल पेमेंट का जमाना आ गया हो, लेकिन एटीएम पिन के मामले में वही पुरानी परंपरा आज भी कायम है. दुनिया के अलग-अलग देशों में भले ही बैंकिंग नियम अलग-अलग हों, लेकिन ज्यादातर जगहों पर आज भी 4 अंकों का पिन ही इस्तेमाल होता है.

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