Golf Ball Holes: गोल्फ की गेंद में क्यों होते हैं गड्ढे, जानें क्या है इसके पीछे की वजह
जब एक पूरी तरह से चिकनी बॉल हवा में चलती है तो यह अपने पीछे एक बड़ा लो प्रेशर एरिया बनाती है. यह बॉल को पीछे की तरफ खींचता है जिससे ड्रैग बढ़ता है और यह धीमी हो जाती है. यह छोटे गड्ढे सतह के चारों ओर एयर फ्लो को डिस्टर्ब करते हैं जिससे हवा की एक पतली टर्बूलेंट लेयर बनती है जो बॉल से ज्यादा चिपक जाती है. यह इसके पीछे लो प्रेशर वेक के साइज को कम करता है और एयर रेजिस्टेंस को काफी कम करता है. इससे बॉल ज्यादा अच्छे से आगे की तरफ बढ़ती है और ज्यादा देर तक स्पीड बनाए रखती है .
गड्ढे सिर्फ ड्रैग को कम नहीं करते बल्कि वह बॉल को ऊपर उठाने में भी मदद करते हैं. जब गोल्फ बॉल को हिट किया जाता है तो वह तेजी से घूमती है. गड्ढे स्पिन के साथ मिलकर बॉल के ऊपर और नीचे के बीच प्रेशर का अंतर पैदा करते हैं. बॉल के ऊपर कम प्रेशर बनता है और उसके नीचे थोड़ा ज्यादा प्रेशर बनता है. इससे लिफ्ट बनती है.
गड्ढों वाली गोल्फ बॉल चिकनी बॉल की तुलना में लगभग दोगुनी दूरी तक जा सकती है. कम ड्रैग और ज्यादा लिफ्ट का कॉम्बिनेशन इसे ज्यादा दूरी तक रफ्तार और ऊंचाई दोनों को बनाए रखने में मदद करता है.
गड्ढे उड़ते समय बॉल को स्टेबल रखने में मदद करते हैं. उनके बिना एयर फ्लो का सेपरेशन असमान होगा. इससे बॉल डगमगाएगी या फिर उसका मूवमेंट सही नहीं होगा.
एक स्टैंडर्ड गोल्फ बॉल में आमतौर पर 300 से 500 गड्ढे होते हैं. इनकी सही संख्या और अरेंजमेंट मैन्युफैक्चरर की एयरोडायनेमिक रिसर्च पर निर्भर करती है.
दिलचस्प बात यह है कि शुरुआती गोल्फ बॉल पूरी तरह से स्मूद होती थी. खिलाड़ियों ने आखिरकार देखा की पुरानी खरोंच वाली बॉल नई बॉल की तुलना में ज्यादा दूर तक जाती थी. बस इसी के बाद गोल्फ बॉल पर एक्सपेरिमेंट किया गया.