प्लेन में लाइट बंद करके क्यों करवाई जाती है लैंडिंग, जानें वजह?

Aircraft Landing: क्या आपने कभी सोचा है कि जब हवाई जहाज लैंडिंग की तैयारी करता है तो केबिन की लाइटें कम या फिर बंद क्यों कर दी जाती हैं? यह एक आम प्रक्रिया लग सकती है लेकिन यात्रियों की सुरक्षा में इसकी एक बड़ी भूमिका होती है. आइए जानते हैं क्या इसके पीछे की वजह.
केबिन की लाइटों को कम करने से यात्रियों की आंखें कम रोशनी वाली स्थिति के हिसाब से ढल जाती हैं. इससे अगर हवाई जहाज की बिजली चली जाए तो वह बेहतर ढंग से देख पाते हैं.
केबिन के अंदर कम रोशनी होने पर बाहर निकलने के लिए जलने वाले साइन और फर्श के पास लगी इमरजेंसी लाइट आसानी से पहचानी जा सकती हैं.
केबिन में कम रोशनी होने से यात्रियों और क्रू के लिए खिड़कियों से बाहर देखना आसान हो जाता है. इससे उन्हें आसपास की स्थितियों का अंदाजा लगाने में मदद मिलती है.
अगर कोई इमरजेंसी होती है तो जो यात्री पहले से ही कम रोशनी के आदी हो चुके हैं उनके लिए स्थिति को समझना और बाहर निकलने के निर्देशों का पालन करना आसान हो सकता है.
इमरजेंसी में हर सेकंड मायने रखता है. एग्जिट साइन और बाहर निकालने के रास्तों के साफ दिखने से यात्रियों को सबसे पास के सुरक्षित एग्जिट की तरफ जाने में मदद मिल सकती है.
अगर हवाई जहाज की बिजली चली जाए तो केबिन में अचानक अंधेरा हो सकता है. पहले से लाइट कम करने से सामान्य केबिन लाइटिंग और अंधेरे के बीच का अंतर कम हो जाता है.
इमरजेंसी लाइट और रिफ्लेक्टिव निशान यात्रियों को एग्जिट की तरफ ले जाने के लिए बनाए जाते हैं. केबिन में कम रोशनी होने से यह सुरक्षा सुविधा साफ तौर पर दिखाई देती हैं.
टेक ऑफ और लैंडिंग के दौरान केबिन की लाइट कम करना कई फ्लाइट में एक मानक सुरक्षा प्रक्रिया है. क्रू सदस्य यात्रियों को इमरजेंसी के लिए तैयार करने के लिए तय प्रक्रिया का पालन करते हैं.