Salty Sweat and Tears: आंसू और पसीना नमकीन क्यों होता है, शरीर में कहां बनता है इतना नमक?

Salty Sweat and Tears: हमारे आंसू और पसीने का स्वाद नमकीन होता है. लेकिन यह नमकीनपन अचानक नहीं होता. यह सीधे तौर पर इस बात से जुड़ा हुआ है कि इंसान का शरीर कैसे बैलेंस बनाएं रखता है, टेम्परेचर को कंट्रोल करता है और जरूरी अंगों की रक्षा करता है. आइए जानते हैं कि पसीने और आंसू को यह नमक कैसे मिलता है.
आंसू और पसीने का स्वाद नमकीन होने की मुख्य वजह सोडियम क्लोराइड है. इसे आमतौर पर नमक कहा जाता है. सोडियम के साथ इनमें पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स भी होते हैं. ये मिनरल्स फ्लूइड बैलेंस बनाए रखने, नर्व सिग्नल को सपोर्ट करने और मसल्स के सही काम को पक्का करने के लिए जरूरी हैं. अब क्योंकि आंसू और पसीना ब्लड स्ट्रीम से जुड़े फ्लूइड से निकलते हैं इस वजह से उनमें यह घुले हुए सॉल्ट नेचुरली होते हैं.
आंसू लगभग 98% पानी से बने होते हैं. लेकिन बाकी हिस्से में नमक, प्रोटीन और तेल होते हैं. हर आंसू में थोड़ा सा नमक होता है जो बैक्टीरियल इन्फेक्शन को रोकने में मदद करता है.
पसीने की ग्रंथियां खून से पानी और नमक निकालती हैं. शरीर के गर्म होने पर उन्हें स्किन के जरिए छोड़ती हैं. जब पसीना भाप बनकर उड़ता है तो यह शरीर को ठंडा करता है और ज्यादा गर्मी से बचाता है. हालांकि कुछ पानी शरीर फिर से सोख लेता है लेकिन नमक स्किन पर ही रह जाता है.
इंसान का शरीर नेचुरली नमक नहीं बनाता है. इसके बजाय नमक रोजाना के खाने और पीने के पानी के जरिए शरीर में जाता है. एक बार लेने के बाद यह इलेक्ट्रोलाइट्स में घुल जाता है और खून और शरीर के फ्लूइड में घूमता है. यह इलेक्ट्रोलाइट्स हाइड्रेशन बनाए रखने, ब्लड प्रेशर को रेगुलेट करने और नसों और मांसपेशियों के बीच कम्युनिकेशन को सपोर्ट करने में मदद करते हैं.
एक सेहतमंद इंसान के शरीर में लगभग 225 ग्राम नमक होता है. यह नमक खून, टिशु और सेल्स के बीच के फ्लूइड में होता है. यह फ्लूइड बैलेंस बनाए रखने, सही नर्व ट्रांसमिशन पक्का करने और मसल्स के सिकुड़ने में मदद करने में जरूरी भूमिका निभाता है.
जब नमक का लेवल शरीर की जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है तो किडनी ज्यादा नमक को फिल्टर करके यूरिन के जरिए निकाल देती है. कुछ नमक पसीने और आंसुओं से भी निकलता है. इससे यह पक्का होता है कि इलेक्ट्रोलाइट लेवल स्थिर रहे और शरीर में नुकसानदायक इम्बैलेंस रुक जाए.