Queen Bee Smuggling: रानी मक्खी की तस्करी क्यों कर रहे लोग, बाजार में इसकी कीमत कितनी; भारत में इसको लेकर क्या कानून?

Queen Bee Smuggling: यह सुनने में काफी अजीब लग सकता है लेकिन रानी मधुमक्खियां दुनिया की सबसे ज्यादा तस्करी की जाने वाली जैविक चीजों में से एक हैं. लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर रानी मक्खियों की तस्करी क्यों की जाती है? इस तरह के व्यापार के पीछे एक मजबूत आर्थिक मकसद है. आइए जानते हैं कि इनसे क्या फायदा होता है.
रानी मधुमक्खी किसी भी कॉलोनी में अकेली ऐसी मादा होती है जो बच्चे पैदा कर सकती है. यह हर दिन 1500 से 2000 तक अंडे दे सकती है. बच्चे पैदा करने की उसकी यह असाधारण क्षमता उसे छत्ते की ताकत बनाती है.
रानी मधुमक्खी की क्वालिटी का शहद की पैदावार पर काफी असर पड़ता है. बेहतर या फिर विदेशी नस्ल की रानी मधुमक्खियों वाली कालोनियां 100 किलोग्राम तक शहद पैदा कर सकती हैं. ज्यादा उत्पादन की यह संभावना ही प्रीमियम रानी मधुमक्खियों की बढ़ती मांग और गैर कानूनी व्यापार के पीछे की मुख्य वजह है.
मधुमक्खी को पालने वाले अक्सर बूढी हो चुकी या फिर कमजोर पड़ चुकी रानियों को बदलने के लिए विदेशी रानी मधुमक्खियों की तलाश करते हैं. क्योंकि कुछ खास प्रजातियों को कानूनी तौर पर इंपोर्ट करने में सख्त जांच पड़ताल और देरी होती है इस वजह से कुछ लोग शॉर्टकट के तौर पर तस्करी का रास्ता अपना लेते हैं.
आम बाजार में एक मेटेड रानी मधुमक्खी की कीमत आमतौर पर ₹1600 से ₹3300 के बीच होती है. हालांकि नीलामी में बिकने वाली प्रीमियम नस्लों की कीमत ₹33000 या उससे भी ज्यादा हो सकती है. अंतर्राष्ट्रीय काले बाजार में दुर्लभ या फिर प्रतिबंधित प्रजातियां हजारों डॉलर में बिक सकती हैं.
भारत में पर्यावरण को नुकसान और बीमारियों के फैलने से रोकने के लिए सख्त नियम कानून लागू हैं. वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित प्रजातियों का गैर कानूनी व्यापार करने पर गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई हो सकती है. इसके अलावा रानी मधुमक्खियों के आयात के लिए संगरोध मंजूरी और आधिकारिक परमिट की जरूरत होती है.
भारत में व्यावसायिक मधुमक्खी पालन को राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड जैसे अधिकारियों के साथ पंजीकरण कराना जरूरी है. सीमा बल और नियामक एजेंसियां मधुमक्खियों की अवैध आवाजाही पर नजर रखती हैं.