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अक्सर फ्लाइट की सीट क्यों होती है नीली? यह है इसके पीछे की वजह

एबीपी लाइव   |  17 Sep 2024 10:01 AM (IST)
अक्सर फ्लाइट की सीट क्यों होती है नीली? यह है इसके पीछे की वजह

फ्लाइट से लंबी दूरी का सफर महज चंद घंटों में पूरा हो जाता है. ये भी एक बड़ी वजह है कि लोग लंबी दूरी का सफर फ्लाइट से करते हैं. फ्लाइट से लंबी दूरी का सफर महज चंद घंटों में पूरा हो जाता है. ये भी एक बड़ी वजह है कि लोग लंबी दूरी का सफर फ्लाइट से करते हैं.

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आज के वक्त पहले की तुलना में फ्लाइट में सफर करना काफी किफायती हो चुका है. आम परिवार भी अब आसानी से फ्लाइट में सफर कर पा रहा है.

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सोशल मीडिया पर फ्लाइट से जुड़ा बहुत सारा फैक्ट देखने को मिल जाता है. इसमें एक फैक्ट फ्लाइट के सीट को लेकर भी सामने आता है.

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अगर आपने कभी फ्लाइट में यात्रा की होगी, तो आपने इस बात पर गौर किया होगा कि एरोप्लेन की सभी सीटें नीले रंग की होती है. लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि प्लेन की सभी सीटें नीले रंग की ही क्यों होती हैं.

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बता दें कि नीला रंग विश्वसनीयता और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है. हालांकि कुछ लोग ये मानते हैं कि आसमान का रंग नीला हेता है, इसी कारण प्लेन की सीटों का रंग भी नीला रखा जाता है.

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लेकिन इसकी असली वजह कुछ और ही है. कई मीडिया रिपोर्टेस के मुताबिक एरोप्लेन में नीली सीटों का इस्तेमाल कई दशकों पहले शुरू किया गया था. आज भी सभी एयर लाइंस अपने प्लेनों में नीले रंग की सीटें ही इस्तेमाल करती है.

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ब्रिटिश वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध के मुताबिक नीले रंग को लोग विश्वसनीयता और सुरक्षा के साथ जोड़कर देखते हैं. नीला रंग उन लोगों के लिए भी बहुत ज्यादा मददगार साबित होता है, जो लोग एयरफोबिया से ग्रसित होते हैं.

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बता दें कि नीला रंग एयरोफोबिया से ग्रसित लोगों को शांत रखने में अहम भूमिका निभाता है. शोध में भी सामने आया है कि करीब 90 प्रतिशत लोग किसी ब्रैंड के कलर्स के आधार पर उसकी ओर रुख करते हैं. इसी कारण से ज्यादातर लोग नीले रंग को अपने ब्रैंड लोगो के लिए भी इस्तेमाल करते हैं.

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लेकिन अब कई फ्लाइट्स में कंपनी ने सीटों का रंग बदला है. लेकिन अमूमन फ्लाइट्स में सीट का रंग नीला ही होता है. वहीं 70 और 80 के दशक में कुछ एयरलाइन्स कंपनियों ने एरोप्लेन में सीटों का रंग लाल कर दिया था.

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