नकली सूरज क्यों बना रहे हैं चीन और अमेरिका, क्या असली वाले का अंत होने वाला है या वजह कुछ और है?
जब दुनिया भर में ये खबर फैली कि चीन और अमेरिका जैसे देश नकली सूरज बना रहे हैं तो सबसे पहले लोगों के मन में यही सवाल आया कि क्या असली वाला सूरज खत्म होने वाला है? अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो ये गलत है. दरअसल, अमेरिका और चीन नकली सूरज ऊर्जा के लिए बना रहे हैं.
चीन ने नकली सूरज 2021 में ही बना लिया था. 2021 में उसने इस नकली सूरज से 101 सेकेंड्स तक के लिए 12 करोड़ डिग्री सेल्सियस का तापमान उत्पन्न किया था.
जबकि, जून 2022 में उसने अपने इसी सूरज से अपना पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए 17 मिनट तक असली सूरज की तुलना में 5 गुना अधिक टेंप्रेचर जेनरेट किया था.रिपोर्ट के मुताबिक, इस नकली सूरज का नाम EAST (Experimental Advanced Superconducting Tokamak) है.
चीन के बाद अमेरिका ने भी दिसंबर 2022 में लैब में नकली सूरज का निर्माण कर लिया था. रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इस नकली सूरज की मदद से अमेरिका ने असली सूरज के तापमान से सौ गुना ज्यादा तापमान जनरेट किया है.
अब सवाल उठता है कि इन प्रयोगों से फायदा क्या होगा? दरअसल, इस प्रयोग के परिणाम स्वच्छ ऊर्जा की दशकों पुरानी खोज के लिए अहम कदम साबित हो सकते है. कुछ वैज्ञानिकों द्वारा परमाणु फ्यूजन रिएक्शन को भविष्य की एक संभावित ऊर्जा माना जाता है.
आपको बता दें, न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्शन तब होता है जब दो या दो से अधिक परमाणु एक बड़े परमाणु में मिल जाते हैं. इस क्रिया में गर्मी के रूप में भारी ऊर्जा पैदा होती है. सबसे बड़ी बात की इसमें रेडियोएक्टिव कचरा पैदा नहीं होता है.