काले भालू क्यों नहीं होते एक जैसे, अलग-अलग रंगों की क्या है वजह?
बल्कि ज्यादातर भालुओं का रंग दालचीनी का भी होता है. उत्तर अमेरिका में पाया गया है कि जब काले भालू को उसके नाम या उसके रंग के नाम के आधार पर बुलाया जाता है तो वो काफी भ्रमित करते हैं. दरअसल हाल ही में हुए अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है.
हडसन एल्फा, मेमफिस यूनिवर्सिटी और पेनसिलवेनिया यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम ने भालुओं के अलग-अलग रंग के रहस्य को सुलझाया है.
इस रिसर्च के लिए शोधकर्ताओं ने काले भालुओं के कई डिएनए और समूने लिए. इस रिसर्च में पाया गया है कि स्तनपायी जानवरों में त्वचा कोशिकाओं से मेलनोसाइट्स नाम का पिग्मेंट पैदा होता है.
मेलेनिन दो प्रकार के होते हैं यूमेलेनिन काला या कत्थई होता है तो वहीं फ्योमेलेनिन लाल या पीला होता है. मोटे तौर पर माना जाता है कि मेलेनिन बायोसिंथेसिसि में अनुवांशिकी विविधता के कारण ही बाल, आंखें और त्वचा के रंग में अंतर आता है.
200 भालुओं के जीनोम सीक्वेंस विश्लेषण से ये पता चला है कि अलग-अलग प्रकार के टायरोसिनेज संबंधी प्रोटीन 1 (TYRP1) में म्यूटेशन होते हैं. TYRP1R153C म्यूटेशन दालचीनी रंग वाले काले भालू में जबकि TYRP1R114C म्यूटेशन खाकी भालूओं में पाया गाया. रिसर्च में पाया गया है कि TYRP1 जीन ही ऐसे एंजाइनम पैदा करता है जिसकी मदद से यूमेलेनिन पैदा होता है और ये भालुओं का अलग-अलग रंग देता है.