बियर की बोतल हरी या भूरी क्यों होती है? जानें इसके पीछे की असली वजह
बियर का इतिहास हजारों साल पुराना है. प्राचीन मेसोपोटामिया और मिस्र में भी बियर बनाई और पी जाती थी. शुरुआत में इसे मिट्टी के बर्तनों और बाद में पारदर्शी कांच की बोतलों में रखा जाने लगा, लेकिन जैसे-जैसे बियर का व्यापार बढ़ा और इसे दूर-दराज तक भेजा जाने लगा.
लेकिन, एक बड़ी समस्या सामने आई बियर का स्वाद जल्दी खराब हो जाता था. बियर में हॉप्स नाम का एक खास तत्व होता है, जो उसके स्वाद और खुशबू के लिए बेहद जरूरी है. जब बियर पर सूरज की अल्ट्रावायलेट यानी UV किरणें पड़ती हैं, तो ये किरणें हॉप्स के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया कर देती हैं.
इससे बियर में अजीब सी बदबू आने लगती है, जिसे आम भाषा में स्कंकी स्मेल कहा जाता है. यही कारण है कि धूप में रखी बियर अक्सर खराब लगती है. इस समस्या का समाधान खोजते हुए बियर निर्माताओं ने पाया कि भूरे रंग की कांच की बोतलें UV किरणों को सबसे ज्यादा रोकती हैं.
भूरे रंग की बोतल सूरज की हानिकारक रोशनी का बड़ा हिस्सा ब्लॉक कर देती है, जिससे बियर का स्वाद और खुशबू लंबे समय तक सुरक्षित रहती है. यही वजह है कि लंबे समय तक भूरी बोतलें बियर इंडस्ट्री का स्टैंडर्ड बन गईं.
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कई देशों में कांच की कमी हो गई, खासकर भूरे कांच की. ऐसे में बियर कंपनियों को मजबूरी में हरे रंग की बोतलों का इस्तेमाल करना पड़ा. हरी बोतलें UV किरणों से कुछ हद तक सुरक्षा देती हैं, हालांकि भूरी बोतल जितनी नहीं. धीरे-धीरे लोगों को हरी बोतलें पसंद आने लगीं और कई ब्रांड्स ने इसे अपनी पहचान बना लिया.
पारदर्शी या सफेद कांच की बोतलें देखने में आकर्षक जरूर होती हैं, लेकिन ये UV किरणों को बिल्कुल नहीं रोक पातीं. ऐसी बोतलों में रखी बियर जल्दी खराब हो सकती हैं. इसी कारण पारदर्शी बोतल का इस्तेमाल बहुत कम किया जाता है, और अगर किया भी जाता है तो खास पैकिंग या केमिकल ट्रीटमेंट के साथ.
आज भले ही बियर कैन, केग और आधुनिक पैकेजिंग में मिलने लगी हो, लेकिन हरी और भूरी बोतलें अब भी भरोसेमंद मानी जाती हैं. ये न सिर्फ बियर की क्वालिटी बचाती हैं, बल्कि ग्राहकों के दिमाग में एक क्लासिक और प्रीमियम छवि भी बनाती हैं. इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि बोतल का रंग बियर के स्वाद का मूक रक्षक है.