लाल, नीले या काले नहीं, हवाई जहाज का रंग हमेशा सफेद ही क्यों होता है?
हवाई जहाज से यात्रा करना आज भी बहुत से लोगों के लिए खास अनुभव होता है. जो लोग सफर कर चुके हैं, उन्होंने गौर किया होगा कि दुनिया की लगभग हर बड़ी एयरलाइन के विमान सफेद रंग के ही होते हैं. भले ही उन पर अलग-अलग रंगों की ब्रांडिंग हो, लेकिन मूल रंग अधिकतर सफेद ही रहता है. इसके पीछे सिर्फ डिजाइन नहीं, बल्कि सुरक्षा, विज्ञान और खर्च से जुड़े कई ठोस कारण हैं.
हवाई जहाज जमीन से कई किलोमीटर ऊपर उड़ते हैं, जहां वे सीधे तेज धूप के संपर्क में रहते हैं. ऊंचाई पर सूरज की किरणें ज्यादा प्रभावी होती हैं और विमान का ढांचा जल्दी गर्म हो सकता है. सफेद रंग की खासियत यह है कि वह सूरज की रोशनी को ज्यादा रिफ्लेक्ट करता है.
इससे प्लेन के अंदर और बाहर का तापमान संतुलित रहता है और एयरक्राफ्ट के मेटल स्ट्रक्चर पर कम दबाव पड़ता है. हवाई जहाज का हर किलो वजन ईंधन की खपत बढ़ाता है. सफेद रंग के पेंट में केमिकल और पिगमेंट कम होते हैं, जिससे इसका वजन हल्का रहता है.
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसी बड़े विमान को गहरे रंग से पूरी तरह पेंट किया जाए, तो उसका वजन इतना बढ़ सकता है जितना 7-8 यात्रियों के वजन के बराबर होता है. ज्यादा वजन का मतलब ज्यादा ईंधन और ज्यादा खर्च होता है.
हवाई जहाज की सुरक्षा में छोटी से छोटी खराबी भी बड़ी भूमिका निभाती है. सफेद रंग पर दरार, डेंट या स्क्रैच आसानी से नजर आ जाता है. इससे इंजीनियरों को समय रहते मरम्मत करने में मदद मिलती है. अगर प्लेन गहरे रंग का हो, तो ऐसी खामियां छिप सकती हैं, जो उड़ान के दौरान खतरा बन सकती हैं.
सफेद रंग का पेंट सस्ता होता है और इसकी मेंटेनेंस भी आसान होती है. किसी हिस्से को दोबारा पेंट करना हो या एयरलाइन का लोगो बदलना हो, तो सफेद बेस पर काम जल्दी और कम खर्च में हो जाता है. यही कारण है कि एयरलाइंस सफेद रंग को आर्थिक रूप से भी सबसे बेहतर विकल्प मानती हैं.
ऊंचाई पर उड़ते समय विमान पर अल्ट्रावायलेट किरणों का असर भी पड़ता है. सफेद रंग इन किरणों से होने वाले नुकसान को कम करता है और विमान की बॉडी को जंग से बचाने में मदद करता है. इससे प्लेन की उम्र बढ़ती है और उसकी मजबूती बनी रहती है.