दिल्ली में किसने बनवाया था जहाज महल, क्यों रखा गया था यह नाम?
जहाज महल का निर्माण लोदी राजवंश ने 1452 से 1526 के दौरान कराया था. इतिहासकारों के अनुसार इसे एक सराय के रूप में बनवाया गया था. ताकि दूर से आने वाले मेहमानों के ठहरने की जगह मिल सके. उसे दौर में अफगानिस्तान, ईरान, इराक, अरब, तुर्की और मोरक्को से कई यात्री दिल्ली आया करते थे जिनकी ठहरने की व्यवस्था नहीं होती थी. इसलिए यह महल बनवाया गया था
इस महल का नाम जहाज महल रखने के पीछे भी बड़ी कहानी है. दरअसल यह महल हौज-ए-शम्सी झील के किनारे बनाया गया था. वहीं बताया जाता है कि जब झील में इस इमारत की परछाई पड़ती थी तो यह ऐसा लगता था जैसे कोई जहाज पानी में तैर रहा हो. इसी वजह से इस इमारत को जहाज महल कहा जाने लगा.
समय के साथ हौज-ए-शम्सी झील तो लगभग सूख गई. लेकिन जहाज महल आज भी अपनी खूबसूरती के साथ खड़ा है. हालांकि इसकी दीवारें और सीढ़ियां जर्जर हो चुकी है. फिर भी बलुआ पत्थरों के खंभे, रंगीन टाइल्स और खूबसूरत छतरियां इसकी ऐतिहासिक खूबसूरती को जीवित बनाए हुए हैं.
जहाज महल में हर साल अक्टूबर महीने में फूलों का मेला आयोजित किया जाता है. यह परंपरा सालों पुरानी है. वहीं अंग्रेजों ने 1942 में इसे बंद कर दिया था लेकिन 1961 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसे दोबारा शुरू करवाया था. वहीं आज भी इस मेले में देशभर के फूल बेचने वाले और पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंचते हैं.
जहाज महल दिल्ली के महरौली इलाके में हौज-ए-शम्सी झील के पास स्थित है. यहां पहुंचने के लिए मेट्रो सबसे आसान ऑप्शन है. येलो लाइन मेट्रो के छतरपुर स्टेशन से उतरकर करीब एक किलोमीटर की दूरी पर यह महल है. यहां सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक फ्री में एंट्री मिलती है.
वहीं अगर आप जहाज महल घूमने का प्लान बना रहे हैं तो अक्टूबर का महीना सबसे बेहतरीन माना जाता है. इस दौरान यहां फूलों का मेला लगता है और माहौल पूरी तरह से त्योहार की तरह हो जाता है.