भारत के इस शहर को कहा जाता है केले की राजधानी, जानकार भी नहीं जानते होंगे जवाब
महाराष्ट्र के जलगांव का मौसम सामान्य तौर पर शुष्क माना जाता है, लेकिन यहां की जमीन और खेती के तरीके केले की फसल के लिए अनुकूल हैं. जिले में हजारों हेक्टेयर जमीन पर केले की खेती की जाती है.
यहां उगाया गया केला महाराष्ट्र के अलावा देश के कई राज्यों में भेजा जाता है. थोक बाजारों में जलगांव का केला बड़ी मात्रा में सप्लाई होता है. केला ऐसा फल है जिसकी मांग पूरे साल रहती है. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के लोग इसे खाते हैं. भारत दुनिया के बड़े केला उत्पादक देशों में शामिल है, और इस उत्पादन में जलगांव का अहम योगदान है.
जलगांव के किसान आधुनिक खेती तकनीक का इस्तेमाल करते हैं. यहां ड्रिप इरिगेशन प्रणाली बड़े स्तर पर अपनाई गई है. इस तकनीक में पानी सीधे पौधे की जड़ों तक बूंद-बूंद पहुंचाया जाता है.
इससे पानी की बचत होती है और पौधों को सही मात्रा में नमी मिलती है. कम पानी में बेहतर उत्पादन मिलने के कारण यह तरीका किसानों के लिए फायदेमंद साबित हुआ है. ड्रिप इरिगेशन के कारण फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है.
यहां के केले आकार में बड़े और स्वाद में मीठे माने जाते हैं. यही वजह है कि बाजार में इनकी मांग ज्यादा रहती है. जानकारी के अनुसार जलगांव में औसतन लगभग 70 टन प्रति हेक्टेयर तक केला उत्पादन होता है.
यह आंकड़ा देश के कई अन्य इलाकों से अधिक है. बड़े पैमाने पर उत्पादन होने के कारण यहां से केले की आपूर्ति लगातार बनी रहती है. व्यापारी और थोक खरीदार सीधे किसानों या मंडियों से खरीदारी करते हैं.
जलगांव के केले को भौगोलिक संकेत यानी GI टैग मिला हुआ है. GI टैग किसी उत्पाद की विशेष पहचान को दर्शाता है, जो उसके क्षेत्र से जुड़ी होती है. इसका मतलब है कि जलगांव का केला अपनी खास गुणवत्ता और क्षेत्रीय पहचान के कारण अलग माना जाता है. इससे किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिलने में मदद मिलती है.