RBI Gold: आरबीआई के पास कहां से आता है सोना, जानें कैसे होती है खरीद?

RBI Gold: भारत के बढ़ते गोल्ड रिजर्व और ऐसी खबरों के बीच कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए अरबों डॉलर का सोना बेचा है, लोगों के मन में यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है कि देश का सेंट्रल बैंक असल में सोना कैसे खरीदता है. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
आरबीआई मुख्य रूप से इंटरनेशनल बुलियन मार्केट से ओवर द काउंटर तरीके से सोना खरीदता है. रिटेल मार्केट से खरीदने के बजाय यह सीधे बड़े ग्लोबल बुलियन बैंक और इंटरनेशनल स्तर पर मान्यता प्राप्त रिफाइनर्स के साथ डील करता है. इससे सेंट्रल बैंक को बड़ी मात्रा में सोना आसानी से मिल जाता है और साथ ही ग्लोबल क्वालिटी स्टैंडर्ड्स का भी पालन होता है.
बुलियन मार्केट के अलावा आरबीआई इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड और दूसरे देशों के सेंट्रल बैंकों से बी सोना खरीदता है. इसका एक बड़ा उदाहरण 2009 में देखने को मिला था जब आरबीआई ने एक ही बार में 200 टन सोना खरीदा था.
आरबीआई द्वारा खरीदी गई सोने की हर खेप को लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन के गुड डिलीवरी स्टैंडर्ड को पूरा करना होता है. इसका मतलब है कि सोने की शुद्धता कम से कम 99.5 प्रतिशत होनी चाहिए.
आरबीआई भारतीय रुपये का इस्तेमाल करके सोना नहीं खरीदता है. इसके बजाय वह विदेशी मुद्रा भंडार जैसे डॉलर, यूरो और दूसरी इंटरनेशनल करेंसी का इस्तेमाल करता है.
भारत का सोना मुंबई और नागपुर में काफी सुरक्षित तिजोरियों में रखा जाता है. इसी के साथ कुछ हिस्सा बैंक ऑफ इंग्लैंड और स्विट्जरलैंड में बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटेलमेंट्स जैसे संस्थानों के पास भी रहता है.
भारत के फाइनेंशियल सिस्टम में भरोसा बनाए रखने में सोना बड़ी भूमिका निभाता है. यह महंगाई करेंसी में उतार-चढ़ाव, जियो पॉलिटिकल तनाव और ग्लोबल आर्थिक झटकों से बचाव का एक जरिया है.