घूमते-घूमते रुक जाए धरती तो क्या होगा, क्या होगा असर?

अगर धरती अपनी धुरी पर घूमना अचानक बंद कर दे, तो क्या होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा होना पूरी तरह असंभव है, लेकिन इस विचार से यह स्पष्ट हो जाता है कि पृथ्वी का मौसम, जीवन, समुद्र और हरियाली इसकी घूर्णन गति पर किस तरह टिके हुए हैं. अगर धरती का घूमना रुक गया, तो जीवन का अस्तित्व ही हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा.
धरती की सतह पर मौजूद हर चीज इस समय लगभग 1600 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से घूम रही है. अगर पृथ्वी अचानक रुक जाती है, तो जड़त्व के नियम के कारण वातावरण, समुद्र और जमीन की सभी चीजें उसी रफ्तार से आगे की ओर फेंक दी जाएंगी.
इस अचानक आए ब्रेक से सुपरसोनिक हवाएं चलेंगी, जिससे बड़ी-बड़ी इमारतें सेकंडों में जमींदोज हो जाएंगी. इंसान, गाड़ियां और विशाल संरचनाएं हवा में उछलकर दूर जा गिरेंगी, जिससे पल भर में महाविनाश फैल जाएगा.
धरती के लगातार घूमने से उत्पन्न बल के कारण इसका आकार थोड़ा चपटा है और समुद्र का पानी भूमध्य रेखा के पास जमा रहता है. घूर्णन बंद होते ही गुरुत्वाकर्षण का संतुलन बिगड़ जाएगा और सारा पानी उत्तर तथा दक्षिण ध्रुवों की तरफ तेजी से बहने लगेगा.
इस वजह से कई महाद्वीप और तटीय देश पूरी तरह जलमग्न हो जाएंगे. समुद्र के इस विस्थापन से दुनिया के नक्शे पर नई झीलें, विशाल रेगिस्तान और नए जलस्रोत बन जाएंगे. घूर्णन रुकने से दिन और रात का 24 घंटे वाला चक्र हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा.
इसके बाद साल में केवल एक बार दिन और एक बार रात होगी, यानी 6 महीने तक सूरज चमकेगा और 6 महीने तक पूरी तरह अंधेरा रहेगा. सूरज वाली दिशा में असहनीय भीषण गर्मी और तापमान होगा, जबकि अंधेरे वाले हिस्से में हाड़ कपाने वाली बर्फबारी और ठंड होगी.
हवाओं और बारिश का स्वाभाविक चक्र टूटने से चारों तरफ भयानक सूखा और तूफान आएंगे. धरती का जीवन चक्र सूर्य के प्रकाश के नियमित चक्र पर ही निर्भर है. लगातार धूप रहने या कई महीनों तक अंधेरा रहने से पेड़-पौधों में भोजन बनाने की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया ठप पड़ जाएगी.
वनस्पति नष्ट होने से शाकाहारी और मांसाहारी जीवों का चक्र टूट जाएगा. पक्षियों और जानवरों के प्रजनन और प्रवास का पैटर्न बिगड़ जाएगा, जिससे पृथ्वी की अधिकतर प्रजातियां बहुत तेजी से विलुप्त होने लगेंगी.
पृथ्वी का घूमना इसके अंदरूनी तरल कोर को सक्रिय रखता है, जिससे एक सुरक्षात्मक चुंबकीय क्षेत्र बनता है. घूर्णन रुकते ही यह चुंबकीय ढाल पूरी तरह खत्म हो जाएगी और सूर्य से आने वाली खतरनाक रेडिएशन सीधे धरातल पर पहुंचेगी. इसके अलावा धरती का अंदरूनी संतुलन बिगड़ने से हर तरफ महाविनाशकारी भूकंप आएंगे, जमीन फटने लगेगी और सक्रिय ज्वालामुखी एक साथ फटने लगेंगे.