ये नेबुला क्या है? जानिए अंतरिक्ष में खूबसूरत तारे कैसे बनते हैं
नेबुला शब्द की खोज 16वीं शताब्दी में ब्रिटिश खगोलविद विलियम हेर्शल ने की थी. वैज्ञानिकों का मानना है कि नेबुला दो तरह से बनते हैं. पहला जब ब्रह्मांड की उत्पत्ति के लिए महाविस्फोट हो और दूसरा जब कोई तारा किसी विस्फोट की वजह से मरता है. हालांकि, किसी तारे का मरना भी एक नए तारे के जन्म का कारण बनता है और यह प्रक्रिया सतत रूप से चलती रहती है.
निहारिका नेबुला को हमारे सौरमंडल का जनक माना जाता है. दरअसल, जब विस्फोट के बाद पूरे अंतरिक्ष में गैस और धूल के कण इकट्ठा हो जाते हैं तो उन्हीं की वजह निहारिकाओं का निर्माण होता है. फिर इन्हीं निहारिका नेबुला की वजह से सूर्य और कई ग्रहों का निर्माण होता है.
इसी तरह जब कोई तारा एक बड़े विस्फोट जिसे सुपरनोवा कहते हैं के साथ मरता है तो पूरे ब्रह्मांड में ढेर सारे धूल के कण और गैस फैल जाते हैं. इन्हीं गैसों और धूल के कणों से फिर एक नए तारे का जन्म होता है. हालांकि, इन सब के बीच अंतरिक्ष में जो तस्वीरें बनती हैं वो देखने में कमाल की लगती हैं.
आपको जानकर हैरानी होगी कि पृथ्वी के सबसे नजदीक जो नेबुला है उसका नाम हेलिक्स नेबुला है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह नेबुला बिल्कुल सूर्य के जैसा हो सकता है. कहा जा रहा है कि ये नेबुला लगभग 700 प्रकाश वर्ष दूर है.
वहीं एक दूसरा नेबुला है जिसे कैरिना नेबुला कहते हैं. ये नेबुला पृथ्वी से लगभग 7600 प्रकाश वर्ष दूर है. यह एक विशालकाय गैस से बना नेबुला है जिसकी तस्वीर देखने में बेहद सुंदर लगती है. इसके साथ ही इसमें आपको धूल के बादल भी दिखाई दे रहे होंगे.
इसी तरह एक नबुला और है जिसे ओमेगा नेबुला कहा जा रहा है. इस नेबुला में सबसे ज्यादा आयोनाइज्ड हाइड्रोजन गैस है. यह नेबुला पृथ्वी से लगभग 5 से 6 हजार प्रकाश वर्ष दूर है.