River Cleaning: किसी नदी को साफ करने का क्या होता है प्रोसेस, इस पर कितना पैसा होता है खर्च?

River Cleaning: नदियां शहरों, खेती और इकोसिस्टम की जीवन रेखा होती हैं. लेकिन उन्हें साफ रखना सिर्फ पानी से कचरा हटाने से काफी ज्यादा मुश्किल काम है. नदी की सफाई के आधुनिक प्रोजेक्ट्स में गंदे पानी का ट्रीटमेंट, इंडस्ट्रियल प्रदूषण पर रोक, ड्रेजिंग, इकोसिस्टम को ठीक करना और लंबे समय तक देखभाल शामिल है. आइए जानते हैं कि किसी भी नदी को साफ करने का क्या प्रोसेस होता है और इस पर कितना पैसा खर्च होता है.
सफाई की प्रक्रिया पानी की सतह पर तैरने वाले कचरे जैस प्लास्टिक की बोतल, पॉलीथीन बैग, कूड़ा करकट और दूसरी चीजों को हटाने से शुरू होती है. अधिकारी कचरा इकट्ठा करने के लिए ट्रैश स्किमर, नावों और आजकल ऑटोमेटिक रोबोटिक सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं. ऐसा इसलिए ताकि कचरा नदी में आगे बहने से पहले ही हटा दिया जाए.
नदी प्रदूषण का एक बड़ा कारण नालों के जरिए नदियों में मिलने वाला बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज और इंडस्ट्रियल कचरा है. इंटरसेप्शन और डायवर्जन प्रक्रिया के तहत इन नालों का रास्ता नदी से दूर कर दिया जाता है ताकि गंदे पानी को पर्यावरण में वापस छोड़ने से पहले ट्रीट किया जा सके.
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट नदी को फिर से ठीक करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. ये प्लांट प्रदूषण फैलाने वाले तत्व, हानिकारक बैक्टीरिया और जहरीले पदार्थ को हटाने के लिए बायोलॉजिकल, केमिकल और आधुनिक फिल्ट्रेशन तकनीक का इस्तेमाल करते हैं जिससे साफ पानी वापस नदी में बहता है.
वक्त के साथ नदियों की तलहटी में जहरीली गाद, मिट्टी और इंडस्ट्रियल कचरा जमा हो जाता है. इन चीजों को हटाने और साफ करने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है. इससे पानी का बहाव बेहतर होता है, पानी जमा करने की क्षमता बढ़ती है और नदी से जुड़े जमीन के नीचे के प्राकृतिक जल स्रोतों को फिर से जीवित करने में मदद मिलती है.
नदी की सफाई के आधुनिक प्रोजेक्ट्स में अब बायोरेमेडीएशन तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है. पानी में घुली ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने और नदी के प्राकृतिक इकोलॉजिकल संतुलन को बहाल करने के लिए खास सूक्ष्मजीवों, जलीय पौधों और ऑक्सीजनेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है.
प्रोजेक्ट के पैमाने के आधार पर खर्च में काफी बड़ा अंतर होता है. छोटे शहरी नालों के लिए सालाना ₹50 लाख से ₹5 करोड़ का बजट लग सकता है और बड़ी नदियों के लिए भारी निवेश की जरूरत होती है. नमामि गंगे मिशन जैसे प्रोजेक्ट के लिए ₹30,000 करोड़ से ज्यादा का फंड मिला है.