घर गिराने का क्या है कानून? जान लीजिए आज
बता दें इस तरह राज्यों में घर को गिराने के पीछे कई तरह के कारण हो सकते हैं. जैसे- सरकारी री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट, गैरकानूनी निर्माण, अवैध बस्ती को हटाने कर काम, प्राकृतिक आपदा के बाद विकास, शहरीकरण, भूमि अधिग्रहण, मेंटिनेंस न होने के कारण जर्जर होने वाले घर और विरासत को सहेजने के लिए सरकार की तरफ से की जाने वाली कार्रवाई.
ऐसी कार्रवाई के लिए अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम हैं. ऐसे मामले सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश से चर्चा में आए हैं. यहां के नियम के अनुसार, प्रदेश में ऐसे मामलों में अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट 1973 के तहत कार्रवाई की जाती है.
मकान को पूरा ढहाया जाना है या कुछ हिस्सा तोड़ा जाएगा या फिर जिसका घर तोड़ा जा रहा है वो क्या कर सकता है, इसकी पूरी जानकारी इस कानून में मिलती है
उत्तर प्रदेश के अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट 1973 की धारा 27 के अनुसार, ऐसी कार्रवाई तब की जाएगी जब घर या विकास कार्यों के मास्टर प्लान में नियमों का उल्लंघन किया गया हो साथ ही जरूरी मंजूरी भी ली गई हो.
मास्टर प्लान का उल्लंघन किया गया हो या फिर नियमविरुद्ध निर्माण किया जा रहा हो. इस स्थिति में प्रशासन बुलडोजर चलाकर निर्माण या घर को गिरा सकती है या फिर सिर्फ उस हिस्से को तोड़ सकता है जो विवादित हो. वहीं इसके लिए भी बकायदा आदेश जारी किया जाता है. यदि अवैध इमारत, मकान, घर को गिराने का आदेश जारी हो जाता है तो आने वाले 15 से 40 दिन के अंदर यह कार्रवाई की जाती है..