Indian Currency Paper: आम कागज और भारतीय नोटों के कागज में क्या होता है फर्क, जानें कहां से किया जाता है इंपोर्ट?
आम कागज लकड़ी के गूदे से बनता है जबकि भारतीय बैंक नोट 100% कपास के रेशों से बनाए जाते हैं. कपास करेंसी नोटों को बेहतर लचीलापन और मजबूती देता है.
कपास के रेशों की वजह से बैंक नोट रोजाना इस्तेमाल होने वाले कागज की तुलना में काफी ज्यादा टिकाऊ होते हैं. वे आसानी से फटते नहीं हैं और पानी या फिर पसीने के संपर्क में आने पर भी घुलते नहीं है.
भारतीय करेंसी नोटों की बनावट आम कागज की चिकनी सतह से थोड़ी अलग होती है. यह खुरदुरी होती है. ऐसा इसलिए होता है ताकि दृष्टि बाधित लोगों को छूकर नोट पहचानने में मदद मिले.
आम कागज के उलट बैंक नोट का कागज वाटर मार्क, सुरक्षा धागे और माइक्रो लेटरिंग जैसे एंबेडेड सुरक्षा तत्वों के साथ बनाया जाता है. इन सुविधाओं को कागज बनाने के दौरान ही जोड़ा जाता है जिस वजह से नकली नोट बनाना काफी मुश्किल हो जाता है.
वैसे तो भारत ने आयात पर निर्भरता को कम कर दिया है लेकिन उसके बावजूद भी कुछ कच्चा माल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोर्स किया जाता है. उच्च गुणवत्ता वाला बैंक नोट कागज पारंपरिक रूप से जर्मनी, जापान और यूनाइटेड किंगडम से आयात किया जाता रहा है. पहले स्वीडन और नॉर्वे ऐसे स्कैंडिनेवियाई देशों से भी आयात किया जाता था.
आज भारत की ज्यादातर बैंक नोट कागज की जरूरतें घरेलू स्तर पर ही पूरी होती हैं. होशंगाबाद में सिक्योरिटी पेपर मिल और मैसूर में बैंक नोट पेपर मिल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, जो भारतीय रिजर्व बैंक और भारत सरकार का एक संयुक्त उद्यम है, करेंसी उत्पादन में एक बड़ी भूमिका निभाते हैं.