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क्या होता है स्टेपल वीजा और यह बाकी वीजा से कैसे अलग? इसे लेकर भारत-चीन में होता है विवाद

निधि पाल   |  25 Dec 2025 05:36 PM (IST)
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स्टेपल वीजा एक सामान्य वीजा की तरह पासपोर्ट पर चिपकाया नहीं जाता, बल्कि एक अलग कागज की पर्ची होती है, जिस पर यात्रा से जुड़ी सभी जानकारियां दर्ज रहती हैं. इस पर्ची को पासपोर्ट के साथ स्टेपलर से जोड़ दिया जाता है, इसलिए इसे स्टेपल या नत्थी वीजा कहा जाता है.

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यात्रा पूरी होने के बाद यह कागज आसानी से हटाया या फाड़ा जा सकता है, जिससे पासपोर्ट पर उस यात्रा का कोई स्थायी निशान नहीं बचता है. आम तौर पर जो वीजा जारी किया जाता है, वह पासपोर्ट पर चिपकाया जाता है और उस पर इमिग्रेशन की मुहर लगती है. इससे यह साफ हो जाता है कि यात्री किस देश में कब गया और कब लौटा.

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इसके उलट स्टेपल वीजा में पासपोर्ट पर कोई स्टैम्प नहीं लगता है. यही वजह है कि इसे एक अस्थायी और तकनीकी रूप से कमजोर दस्तावेज माना जाता है. कई देश इसे पूरी तरह वैध वीजा मानने से भी हिचकते हैं.

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स्टेपल वीजा का सबसे बड़ा विवादित पहलू यह है कि इससे यात्रा का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड पासपोर्ट पर दर्ज नहीं होता है. भविष्य में किसी दूसरे देश की यात्रा या वीजा आवेदन के दौरान यह खाली जगह सवाल खड़े कर सकती है. सुरक्षा एजेंसियों और इमिग्रेशन अधिकारियों के लिए भी यह स्थिति असहज होती है, क्योंकि यात्राओं का पूरा इतिहास सामने नहीं होता है.

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भारत और चीन के बीच स्टेपल वीजा लंबे समय से कूटनीतिक विवाद का विषय रहा है. चीन कई बार अरुणाचल प्रदेश और कभी-कभी जम्मू-कश्मीर के निवासियों को सामान्य वीज़ा देने के बजाय स्टेपल वीज़ा जारी करता रहा है. भारत इसे इन क्षेत्रों की संप्रभुता पर सवाल मानता है. चीन का यह कदम यह संकेत देता है कि वह इन इलाकों को भारत का अभिन्न हिस्सा मानने से बच रहा है, जबकि भारत इसे सख्ती से खारिज करता है.

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स्टेपल वीजा सिर्फ यात्रा का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी होता है. जब कोई देश किसी खास क्षेत्र के नागरिकों को सामान्य वीजा देने से बचता है, तो वह परोक्ष रूप से उस क्षेत्र की स्थिति पर अपनी आपत्ति जताता है. यही कारण है कि भारत सरकार स्टेपल वीजा को स्वीकार नहीं करती और ऐसे मामलों में कड़ा विरोध दर्ज कराती है.

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कई देशों में स्टेपल वीजा को पूरी तरह वैध यात्रा दस्तावेज नहीं माना जाता है. एयरलाइंस और इमिग्रेशन अधिकारी भी कई बार ऐसे वीजा पर यात्रियों को अतिरिक्त जांच का सामना कराते हैं. यही वजह है कि इसे लेकर असमंजस और विवाद बने रहते हैं.

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