कितना तापमान कम होने पर कोई दिन कहा जाता है कोल्ड डे, क्या है इसकी परिभाषा?
मौसम विज्ञान की भाषा में कोल्ड डे कोई सामान्य शब्द नहीं, बल्कि भारतीय मौसम विभाग यानी IMD द्वारा तय किया गया तकनीकी मानक है. जब किसी दिन का अधिकतम तापमान अपने सामान्य औसत से काफी नीचे चला जाता है और न्यूनतम तापमान भी कम रहता है, तब उस दिन को कोल्ड डे कहा जाता है.
आम बोलचाल में कहें तो जब दिन में भी ठंड कम नहीं होती, वही स्थिति कोल्ड डे कहलाती है. IMD के नियमों के मुताबिक, मैदानी इलाकों में कोल्ड डे तब माना जाता है जब न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस या उससे कम हो और दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से कम से कम 4.5 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाए.
वहीं अगर अधिकतम तापमान सामान्य से 6.5 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा गिर जाए और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री या उससे कम बना रहे, तो इसे गंभीर कोल्ड डे यानी Severe Cold Day कहा जाता है.
यहां सामान्य तापमान समझना बेहद जरूरी है. सामान्य तापमान किसी एक दिन का अनुमान नहीं होता, बल्कि पिछले लगभग 30 वर्षों के औसत आंकड़ों के आधार पर तय किया जाता है.
हर तारीख के लिए अलग-अलग सामान्य तापमान होता है. इसी औसत से तुलना करके यह तय किया जाता है कि तापमान सामान्य है या असामान्य रूप से कम है. अक्सर लोग सोचते हैं कि ठंड का आकलन रात के न्यूनतम तापमान से होता है, लेकिन कोल्ड डे का आधार दिन का अधिकतम तापमान होता है.
अगर दिन में सूरज निकलने के बावजूद तापमान नहीं बढ़ता, तो यह संकेत है कि ठंड असामान्य स्तर पर है. यही वजह है कि कोल्ड डे का फैसला दिन की ठंड को देखकर किया जाता है, न कि सिर्फ रात की ठंड से.
उत्तर भारत, खासकर दिल्ली-एनसीआर और मैदानी इलाकों में कोल्ड डे की स्थिति सर्दियों में ज्यादा बनती है. इसका बड़ा कारण घना कोहरा, बादल और प्रदूषण से बना स्मॉग है. ये तीनों मिलकर सूरज की रोशनी को जमीन तक पहुंचने से रोक देते हैं. जब धूप नहीं निकलती या बहुत कम निकलती है, तो दिन में तापमान बढ़ ही नहीं पाता और पूरे दिन ठंड बनी रहती है.