ऑक्सीजन खत्म हो जाए तो क्या होगा, कितनी देर में खत्म हो जाएगी धरती?

धरती पर रहने वाले लोगों को जिंदा रहने के लिए हवा, पानी और खाने की जरूरत होती है. लेकिन भविष्य में हमारी पृथ्वी एक ऐसे वैज्ञानिक मोड़ पर पहुंचेगी, जहां इसकी हवा से जीवनदायिनी गैस गायब हो जाएगी. लगभग एक अरब साल बाद धरती के वायुमंडल से ऑक्सीजन का नामोनिशान मिट जाएगा. इसके बाद हमारी खूबसूरत दुनिया का नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा और यह मीथेन गैस के घने आवरण में लिपट जाएगी. ओजोन परत के नष्ट होने से सूरज की किरणें तबाही मचाएंगी और ऑक्सीजन पर निर्भर सभी जीवों का अस्तित्व मिट जाएगा.
आज से एक अरब साल बाद जब ऑक्सीजन खत्म होगी, तो पृथ्वी ठीक उसी पुरानी स्थिति में लौट जाएगी जैसी यह करोड़ों साल पहले हुआ करती थी. उस दौर में वायुमंडल में केवल मीथेन और अन्य विषैली गैसों का बोलबाला था.
ऑक्सीजन पर टिके इंसान, पशु-पक्षी और अन्य सभी जीव-जंतु इस बदलाव को बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे और उनका पूरी तरह नामोनिशान मिट जाएगा. इंसानी सभ्यता ने विज्ञान और तकनीक के दम पर जो भी हासिल किया है, वह सब इस एक बदलाव के साथ ही हमेशा-हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा.
जब पृथ्वी से विशालकाय जीव और इंसान गायब हो जाएंगे, तब केवल वे सूक्ष्म जीव ही बचेंगे जो बिना हवा या ऑक्सीजन के जीने में सक्षम हैं. ये एनारोबिक बैक्टीरिया मीथेन से भरे जहरीले माहौल में भी आसानी से पनप सकते हैं. धरती का हरा-भरा रूप पूरी तरह से बंजर और जहरीली गैसों के गुबार में बदल जाएगा.
ऑक्सीजन खत्म होने का सबसे घातक असर हमारे सुरक्षा कवच यानी ओजोन लेयर पर पड़ेगा. चूंकि ओजोन परत ऑक्सीजन के अणुओं से ही बनती है, हवा में ऑक्सीजन न रहने से यह सुरक्षा परत पूरी तरह टूट जाएगी.
इसके बिना सूर्य से निकलने वाली खतरनाक पराबैंगनी (यूवी) किरणें सीधे धरती की सतह पर गिरेंगी. यह जानलेवा रेडिएशन बची-कुची नमी और हर तरह के जीवन के अंश को हमेशा के लिए भस्म कर देगा.
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सबसे मुख्य कारण सूरज का बदलता स्वरूप होगा. समय के साथ सूरज की चमक और गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है. अत्यधिक तापमान के कारण पेड़-पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया रुक जाएगी. पौधे जब ऑक्सीजन बनाना बंद कर देंगे, तो वायुमंडल में इसका स्तर तेजी से गिरने लगेगा.
अगर इंसान सोचे कि वह अपनी विकसित तकनीक के जरिए इस तबाही को रोक लेगा, तो यह नामुमकिन है. सूरज की बेतहाशा गर्मी पृथ्वी के प्राकृतिक चक्र को इस हद तक बिगाड़ देगी कि कोई भी कृत्रिम तरीका या मानवीय हस्तक्षेप इस बदलाव को उल्टा नहीं कर पाएगा.
पृथ्वी का यह अंत वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड में जीवन की तलाश के लिए एक नया नजरिया देता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि हमें अब ऐसे ग्रहों की भी खोज करनी चाहिए जहां ऑक्सीजन बिल्कुल नहीं है.