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बजट में सिंथेटिक जूते सस्ते करने का ऐलान, क्या Reebok के जूतों के भी घट जाएंगे दाम?

निधि पाल   |  03 Feb 2026 12:43 PM (IST)
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने और निर्यात को बढ़ावा देने पर खास जोर दिया है. इसी कड़ी में सरकार ने चमड़े और सिंथेटिक जूतों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और शू-अपर्स के आयात पर कस्टम ड्यूटी में छूट देने का ऐलान किया है.

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इसका सीधा मतलब है कि जूते बनाने वाली कंपनियों की लागत कम होगी. जूता उद्योग में कच्चे माल की कीमत कुल लागत का बड़ा हिस्सा होती है. जब इनपुट मटीरियल पर लगने वाला आयात शुल्क घटता है, तो फैक्ट्रियों के लिए जूते बनाना सस्ता पड़ता है.

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बजट में ड्यूटी फ्री या कम ड्यूटी की सुविधा मिलने से कंपनियों पर खर्च का दबाव घटेगा. ऐसे में बाजार में सिंथेटिक और चमड़े के जूतों की कीमतें धीरे-धीरे कम होने या कम से कम स्थिर रहने की संभावना बनती है.

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सरकार का साफ फोकस मेड इन इंडिया पर है. कानपुर, आगरा और तमिलनाडु जैसे फुटवियर हब में इस फैसले का सीधा असर देखने को मिल सकता है. उत्पादन बढ़ने से न सिर्फ फैक्ट्रियों की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए मौके भी पैदा होंगे. सरकार को उम्मीद है कि इससे भारत का जूता निर्यात भी तेजी से बढ़ेगा.

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बजट 2026 में एक और अहम राहत दी गई है. पहले जहां तैयार जूतों को निर्यात करने की समय सीमा 6 महीने थी, उसे बढ़ाकर 1 साल कर दिया गया है. इससे लेदर और सिंथेटिक दोनों तरह के फुटवियर बनाने वाली कंपनियों को बेहतर प्लानिंग का मौका मिलेगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की पकड़ मजबूत होगी.

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अब सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है कि Reebok जैसे ब्रांड का क्या होगा? बजट के बाद Reebok सहित बड़े ब्रांड्स के जूतों की कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट की उम्मीद करना सही नहीं होगा. वजह साफ है, ये ब्रांड अपनी कीमत तय करते समय सिर्फ कस्टम ड्यूटी नहीं, बल्कि ब्रांड वैल्यू, मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च भी जोड़ते हैं.

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हालांकि, चूंकि Reebok भारत में भी अपने कई प्रोडक्ट्स बनाता या सोर्स करता है, इसलिए कीमतों में स्थिरता या हल्की कमी जरूर देखने को मिल सकती है.

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