भारत में सबसे पहले आई थी ये शराब, जानें किन लोगों को थी पीने की इजाजत

'बे पिए ही शराब से नफरत, ये जहालत नहीं तो फिर क्या है...' साहिर लुधियानवी ने यह शेर उन लोगों के लिए लिखा, जो बिना पिए ही शराब को खराब बता देते हैं. अब शराब खराब है या अच्छी? इस पर मयखाने के शौकीन एक रिसर्च पेपर तक लिख सकते हैं. हालांकि, हम यहां शराब की क्वालिटी में न पड़कर भारत में उसके इतिहास पर चर्चा करेंगे.
भारत में शराब का इतिहास तो बहुत पुराना है और कई जगह सोमरस का जिक्र मिल जाता है. हालांकि, इसके ठोस प्रमाण मुगल काल और ब्रिटिश शासन में ही मिलते हैं. कहा जाता है कि मुगल दरबार में शराब का चलन काफी ज्यादा था.
कहते हैं कि मुगलों के भारत आने के बाद ही शराब शाही दरबारों तक पहुंची और धीरे-धीरे शाही जीवनशैली का हिस्सा बन गई. मुगल सम्राट अकबर को तो शराब से परहेज था, लेकिन उसके दरबार में इसका सेवन सामान्य था. अकबर के बाद जहांगीर शराब का काफी शौकीन था.
हालांकि, अंग्रेजों के भारत आने के बाद शराब को एक व्यवसाय का रूप मिल गया. यह सोमरस अब मॉर्डर बीयर बन चुकी थी. 1716 तक बीयर को इंग्लैंड से भारत में आयात किया जा रहा था. हालांकि, इतनी लंबी यात्रा से बीयर की क्वालिटी खराब हो रही थी, जिसके बाद एडवर्ड अब्राहम डायर 1830 में भारत की पहली कसौली ब्रेवरी की स्थापना की। यहां से लॉयन ब्रांड बीयर का उत्पादन शुरू हुआ.
इसके बाद भारत में कुछ और ब्रेवरी शुरू की गईं. हालांकि, 1915 में स्कॉटलैंड के बिजनेसमैन ने दक्षिण भारत में चार ब्रेवरी का विलय कराकर यूनाइटेड ब्रुअरीज की स्थापना की.
1947 में भारतीय बिजनेसमैन विट्टल माल्या ने इस कंपनी के शेयर खरीद लिए और कंपनी के पहले भारतीय निदेशक चुने गए. विट्टल माल्या भारतीय बिजनेस मैन विजय माल्या के पिता थे. उनके निधन के बाद यह कंपनी विजय माल्या के पास आ गई.
कहा जाता है ब्रिटिश काल में भारत में शराब का उत्पादन शुरू करने के पीछे ब्रिटिश अधिकारी और ब्रिटिश सेना के जवान थे. शराब का उत्पादन सिर्फ उनके लिए ही होता था. हालांकि, बाद में यह आम लोगों तक भी पहुंच गई.