Artificial Intelligence: एआई के मामले में यह देश चुप चाप बढ़ा रहा अपनी ताकत, जानें क्या है भारत की स्थिति?

Artificial Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ग्लोबल कॉम्पिटीशन के सबसे बड़े क्षेत्र में से एक बनकर उभर रहा है. इसमें देश तकनीकी बढ़त हासिल करने के लिए भारी निवेश कर रहे हैं. जिस तरफ अमेरिका अत्यधिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इनोवेशन में अपना दबदबा बनाए हुए है, वहीं चीन कम लागत वाले और काफी कुशल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल के जरिए चुपचाप अपनी स्थिति को मजबूत कर रहा है. आइए जानते हैं क्या है भारत की स्थिति.
चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर तेजी से उभर रहा है. स्टैनफोर्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंडेक्स जैसी कुछ रिपोर्टर्स के मुताबिक डीपसीक और अलिबाबा के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम जैसे कम लागत वाले और हाई एफिशिएंसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल विकसित कर रहे हैं.
भारत ने ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रैंकिंग में मजबूत स्थिति को हासिल किया है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस परफॉर्मेंस के मामले में वह अमेरिका, चीन और सिंगापुर के बाद दुनिया भर में चौथे स्थान पर आता है. इसी के साथ भारत स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाइब्रेंसी इंडेक्स में तीसरे स्थान पर आता है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने के मामले में भारत दुनिया में सबसे आगे है. देश की 92 प्रतिशत वर्कफोर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल का इस्तेमाल करती है. यह इसे दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अपनाने की सबसे ज्यादा दर वाला देश बनाता है.
देश के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टैलेंट पूल है. इसमें दुनिया के लगभग 16% आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोफेशनल शामिल हैं. इससे भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च, डेवलपमेंट और डिप्लॉयमेंट में काफी बढ़त मिलती है.
भारत अपने खुद के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है. इसमें कृत्रिम, सर्वम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हनुमान जैसे स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल शामिल हैं.
सरकारी पहल और स्टार्टअप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास को तेज कर रहे हैं. ₹10,372 करोड़ का इंडिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को और भी मजबूत कर रहा है.