समुद्र में डूबने वाला है ये देश, लोगों को है डर
वैज्ञानिकों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फ की चादरें पिघल रही हैं और समुद्र का स्तर बढ़ रहा है. यह प्रक्रिया अगले कुछ दशकों में तेज होने की संभावना है. जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, समुद्र के पानी का तापमान भी बढ़ता है, जिससे इसकी मात्रा में वृद्धि होती है. इस वृद्धि का सीधा असर तटीय देशों और द्वीपों पर पड़ता है.
दुनिया भर में कई द्वीपीय देश समुद्र के बढ़ते जलस्तर के कारण सबसे ज्यादा खतरे में हैं. इनमें से कुछ प्रमुख देशों में मालदीव, तुवालु, किरिबाती और मार्शल द्वीप शामिल हैं. इन देशों की अधिकांश आबादी समुद्र तल से कुछ मीटर की ऊंचाई पर रहती है.इसके अलावा बांग्लादेश और मालदीव जैसे देशों का भी बुरा हाल है.
बता दें कि हाल ही में बांग्लादेश के कुछ तटीय क्षेत्रों में बाढ़ के हालात ने इस समस्या की गंभीरता को और उजागर किया है. जुलाई 2023 में आई बाढ़ ने लाखों लोगों को प्रभावित किया और कई गांव जलमग्न हो गए. बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री ने चेतावनी दी कि अगर वैश्विक तापमान में वृद्धि पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले वर्षों में बांग्लादेश के अधिकांश तटीय क्षेत्र डूब सकते हैं.
इसी तरह, मालदीव में भी समुद्र स्तर की वृद्धि एक गंभीर मुद्दा है. 2023 में मालदीव सरकार ने एक योजना शुरू की है जिसके तहत बुनियादी ढांचे को समुद्र के बढ़ते स्तर के खिलाफ सुरक्षित किया जा सके, लेकिन इन प्रयासों के बावजूद लोग लगातार चिंता में हैं कि क्या उनके द्वीप सुरक्षित रहेंगे.
समुद्र के बढ़ते स्तर का असर सिर्फ बांग्लादेश और मालदीव तक सीमित नहीं है. यह पूरी मानवता के लिए खतरा है. विश्व के कई अन्य तटीय शहर जैसे मुंबई, न्यूयॉर्क, और शंघाई भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं. अगर जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो लाखों लोग अपने घरों से बेघर हो सकते हैं.
इस संकट से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है. विभिन्न देशों के बीच सहयोग, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए अनुसंधान में निवेश करना बहुत जरुरी है. संयुक्त राष्ट्र के तहत जलवायु परिवर्तन पर हुई वार्ताओं ने इस दिशा में कुछ प्रगति की है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है.