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आसमान से नीचे क्यों नहीं गिरते लाखों टन भारी बादल, गुरुत्वाकर्षण का नियम यहां क्यों नहीं करता काम?

निधि पाल   |  05 Jul 2026 07:52 PM (IST)
आसमान से नीचे क्यों नहीं गिरते लाखों टन भारी बादल, गुरुत्वाकर्षण का नियम यहां क्यों नहीं करता काम?

जब कभी भी हम आसमान की ओर देखते हैं तो सफेद काले बादलों के तैरते हुए झुंड बहुत खूबसूरत नजर आते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि लाखों टन वजनदार होने के बाद भी ये बादल जमीन पर नीचे की तरफ क्यों नहीं गिरते हैं. न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण का नियम, जो कि दुनिया की हर चीज को नीचे खींचता है, वह यहां पर फेल होता क्यों नजर आता है? चलिए जानें.

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इसको समझने के लिए सबसे पहले यह जानने की जरूरत है कि आखिर बादल कैसे बनते हैं. हमारे आसपास की हवा में हमेशा जलवाष्प यानी गैस के रूप में पानी मौजूद रहता है, जिसे हम खुली आंखों से नहीं देख सकते हैं.

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जब सूरज की गर्मी से यह हवा ऊपर की ओर उठती है तो ऊंचाई पर जाकर तापमान कम होने की वजह से यह ठंडी होने लगती है. ठंडी होने पर यह गैस फिर से सघन होकर पानी की छोटी-छोटी बूंदों का रूप ले लेती है. इन्हीं नन्हीं बूंदों के अरबों-करोड़ों समूहों को हम आसमान में बादल कहते हैं.

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जमीन से देखने पर बादल भले ही हल्के रुई के फाये जैसे दिखते हैं, लेकिन इनका वजन आपको हैरान कर सकता है. गर्मी के मौसम में आसमान में दिखने वाले एक सामान्य बादल का वजन भी कई लाख किलोग्राम या कई टन तक हो सकता है.

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अब सवाल यह है कि इतने वजनदार होने के बाद भी ये कैसे हवा में टिके रहते हैं. दरअसल हवा में सबसे ज्यादा ऑक्सीजन और नाइट्रोजन होती है. जब बादल बनते हैं तो पानी के कण हवा के इन भारी कणों की जगह ले लेते हैं.

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पानी के कणों में मौजूद हाइड्रोजन गैस, हवा में मिलने वाली नाइट्रोजन और ऑक्सीजन के मुकाबले बहुत ज्यादा हल्की होती है. इसी वजह से पानी की बूंदों से भरा होने के बावजूद भी एक पूरा बादल अपने आसपास मौजूद सूखी हवा की तुलना में काफी ज्यादा हल्का और कम घना हो जाता है.

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विज्ञान के इस नियम के कारण कम घनी चीज हमेशा ज्यादा घनी चीज के ऊपर तैरती है. ठीक वैसे ही जैसे पानी से भारी होने के बाद भी तेल उसके ऊपर तैरता है. वैसे ही भारी बादल भी सूखी हवा पर तैरते हैं.

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ऐसा बिल्कुल नहीं है पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल इन बादलों पर काम नहीं करता है. धरती की ग्रेविटी बादलों को भी लगातार नीचे की तरफ खींचती है और इसके प्रभाव से बादलों की पानी की बूंदें बहुत धीमी रफ्तार से नीचे की ओर भी गिर रही होती हैं.

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लेकिन इन बूंदों के गिरने की रफ्तार इतनी कम होती है और ये जमीन से इतनी ऊंचाई पर होते हैं कि हमें इसका अहसास नहीं होता है. इसके अलावा नीचे से ऊपर उठने वाली गर्म हवा के झोंके इनको दोबारा ऊपर धकेल देते हैं.

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