सऊदी के पास तेल के कितने कुएं, ये कब सूख जाएंगे?

सऊदी अरब के तेल भंडारों को लेकर अक्सर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहती हैं कि क्या वहां के कुएं बहुत जल्द सूखने वाले हैं. हालांकि जमीनी हकीकत और वैज्ञानिक आंकड़े एक अलग ही तस्वीर पेश करते हैं. सऊदी के पास 142 से ज्यादा विशाल तेल और गैस क्षेत्र मौजूद हैं, जिनमें हजारों सक्रिय कुएं रात-दिन तेल का उत्पादन कर रहे हैं. वर्तमान में जिस तेजी से वहां क्रूड ऑयल निकाला जा रहा है, उस हिसाब से भी अगले 70 से 80 सालों तक यानी साल 2100 तक यहां का तेल खत्म होने की कोई गुंजाइश नहीं है.
सऊदी अरब की धरती के नीचे प्रमाणित कच्चे तेल का विशाल खजाना छिपा हुआ है, जिसकी कुल क्षमता करीब 250 से 267 अरब बैरल आंकी गई है. यह आंकड़ा सऊदी अरब को दुनिया में दूसरे सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार वाले देश का दर्जा देता है.
इस पूरे विशाल नेटवर्क का प्रबंधन और संचालन सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी सऊदी अरामको के हाथों में है. कंपनी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके रोज लाखों बैरल क्रूड ऑयल निकालकर वैश्विक बाजार तक पहुंचाती है.
अरब के विशाल रेगिस्तान और समुद्र के नीचे फैले तेल क्षेत्रों की अपनी अनोखी पहचान है. जमीन पर स्थित दुनिया का सबसे बड़ा तेल क्षेत्र Ghawar Field यहीं मौजूद है, जहां से रोजाना भारी मात्रा में ईंधन निकलता है.
वहीं समुद्र के भीतर बना दुनिया का सबसे विशाल ऑफशोर ऑयल फील्ड Safaniya Field भी सऊदी के पास ही है. इनके अलावा खुरैस और बुकैक जैसे क्षेत्र क्रूड ऑयल की प्रोसेसिंग और बड़े पैमाने पर उत्पादन के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं.
मौजूदा एक्सट्रैक्शन स्पीड और खपत के अनुपात के मुताबिक सऊदी के कुएं अगले छह से सात दशकों तक पूरी क्षमता से काम करते रहेंगे. विशेषज्ञों के अनुसार 2090 के दशक या उसके बाद तक भी देश का भंडार सुरक्षित रहेगा.
यह समय सीमा इस बात पर भी निर्भर करेगी कि भविष्य में नई खोजों से कितना अतिरिक्त तेल मिलता है. हालांकि कई बार बुनियादी ढांचे पर हमलों या पाइपलाइन बाधित होने से आपूर्ति रुकती है, पर उसका कुओं के सूखने से कोई संबंध नहीं होता है.
सऊदी अरब को इस बात का बखूबी अहसास है कि जीवाश्म ईंधन एक न एक दिन खत्म जरूर होगा. इसी दूरदर्शिता के तहत देश में विजन 2030 पर तेजी से काम चल रहा है.
इसका मकसद अर्थव्यवस्था की निर्भरता तेल से हटाकर अन्य क्षेत्रों पर शिफ्ट करना है. सऊदी सरकार अब सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और अत्याधुनिक शहरों के निर्माण में भारी निवेश कर रही है, ताकि तेल का आखिरी कतरा खत्म होने से बहुत पहले ही देश की आर्थिक स्थिति मजबूत हो चुके.