Samosa History: भारत में नहीं बल्कि यहां हुआ था समोसे का ईजाद, जानें क्या है इसका इतिहास?
समोसे की सबसे पुरानी जड़े दसवीं सदी के फारस में मिलती हैं. यहां इसे सनबोसाग के नाम से जाना जाता था. बाद में यह मध्य पूर्व में संबुसक या संबुसाज के नाम से फैला. इनमें आमतौर पर मांस और मेवे भरे होते थे.
यह स्नैक 13वीं और 14वीं सदी के बीच मध्य एशिया व्यापारियों, यात्रियों और शाही रसोइयों के जरिए भारत लाया गया. इन्होंने इसे दिल्ली सल्तनत के दरबारों में परोसा.
बड़े इतिहासकारों और यात्रियों ने शुरू में ही समोसे का जिक्र किया. अबुल फजल बैहाकी ने इसका जिक्र तारीख-ए-बैहाकी में किया. इसी के साथ इब्न बतूता ने बताया कि इसे मुहम्मद बिन तुगलक के दरबार में कीमा, पिस्ता और बादाम भरकर परोसा जाता था.
आज के गहरे तले हुए रूप के उलट शुरुआती समोसे से बेक्ड होते थे. इन्हें यात्रियों और सैनिकों के लिए पोर्टेबल भोजन के रूप में डिजाइन किया गया था.
भारत आने के बाद स्थानीय सामग्री ने सब कुछ बदल दिया. आलू, मटर, हरी मिर्च और भारतीय मसाले ने मांस की जगह ले ली. इससे बड़े पैमाने पर समोसा एक शाकाहारी स्नैक बन गया.
सदियों से समोसा महलों से लेकर आम सड़कों तक पहुंच गया. अब यह भारतीय खाद्य संस्कृति में काफी गहराई से बस चुका है.