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Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस की परेड से पहले होती है जवानों की ‘अग्निपरीक्षा’, हर हथियार का होता है टेस्ट

निधि पाल   |  21 Jan 2026 10:02 AM (IST)
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हर साल 26 जनवरी को भारत गणतंत्र दिवस मनाता है, क्योंकि इसी दिन 1950 में देश में संविधान लागू हुआ था. साल 2026 में भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा. इस मौके पर राष्ट्रपति देश को संबोधित करते हैं और राजधानी दिल्ली में होने वाली परेड भारत की सैन्य ताकत, अनुशासन और सांस्कृतिक विविधता को दुनिया के सामने रखती है.

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हर साल करीब दो लाख लोग इसे प्रत्यक्ष देखने पहुंचते हैं, जबकि कई विदेशी मेहमान भी इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं. गणतंत्र दिवस परेड का पूरा प्रबंधन रक्षा मंत्रालय की निगरानी में किया जाता है. सेना, नौसेना और वायुसेना के अलावा कई सुरक्षा और प्रशासनिक एजेंसियां मिलकर इसकी तैयारी करती हैं.

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परेड का हर सेकंड पहले से तय होता है, क्योंकि यहां समय में जरा-सी चूक भी बड़ी गलती मानी जाती है. 26 जनवरी की सुबह राष्ट्रपति के कर्तव्य पथ पर पहुंचते ही परेड की औपचारिक शुरुआत होती है. राष्ट्रपति के अंगरक्षक राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देते हैं, राष्ट्रगान बजता है और 21 तोपों की सलामी दी जाती है.

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दिलचस्प बात यह है कि यह सलामी 21 अलग-अलग तोपों से नहीं, बल्कि सेना की 7 तोपों से तीन राउंड में दी जाती है. परेड में शामिल होने वाले जवानों की मेहनत जुलाई से ही शुरू हो जाती है. पहले वे अपने रेजिमेंट सेंटर में अभ्यास करते हैं और दिसंबर तक दिल्ली पहुंच जाते हैं.

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हर जवान लगभग 600 घंटे की कड़ी ट्रेनिंग पूरी करता है. परेड के दिन जवान तड़के करीब 2 बजे तैयार हो जाते हैं और 3 बजे तक कर्तव्य पथ पर पहुंच जाते हैं. झांकियां करीब 5 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं, ताकि दर्शक हर दृश्य को साफ देख सकें. गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने के लिए जवानों को चार स्तर की सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता है.

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उनकी पहचान, पृष्ठभूमि और सेवा रिकॉर्ड की बारीकी से जांच होती है. इसके साथ ही हथियारों की भी पूरी तरह जांच की जाती है ताकि कोई भी हथियार लाइव गोलियों से लोड न हो. सुरक्षा में जरा-सी चूक की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाती.

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परेड में शामिल टैंक, तोप, बख्तरबंद वाहन और अन्य सैन्य उपकरणों के लिए इंडिया गेट के पास विशेष कैंप लगाए जाते हैं. यहां हर उपकरण की तकनीकी और सुरक्षा जांच होती है. रिहर्सल के दौरान हर टुकड़ी करीब 12 किलोमीटर तक मार्च करती है, जबकि परेड के दिन यह दूरी करीब 9 किलोमीटर होती है. पूरे मार्ग पर विशेषज्ञ जज बैठे होते हैं, जो लगभग 200 मानकों पर हर टुकड़ी का मूल्यांकन करते हैं.

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