दक्षिण भारत में दिन में और उत्तर भारत में रात में क्यों होती हैं शादियां, क्या है इसकी वजह?
दक्षिण भारत में सूर्य देव की पूजा का बहुत महत्व है. दिन की रोशनी, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती है. वैदिक परंपरा के अनुसार दिन में देवता अधिक सक्रिय होते हैं, इसलिए शादी का शुभ मुहूर्त सुबह या दोपहर को रखा जाता है.
दक्षिण भारत में शादी अक्सर खुले आंगन में होती है. मंडप और सजावट में केले के पत्ते, फूल और रंग-बिरंगी सजावट का प्रयोग होता है. जलवायु भी एक वजह है, क्योंकि दिन के समय गर्मियों में शादी करना आसान होता है और सूरज की रोशनी से समारोह और फोटोशूट दोनों अच्छे होते हैं.
इसके अलावा, दक्षिण भारत की प्राचीन द्रविड़ परंपराओं में ‘दिवा विवाह’ यानी दिन में विवाह करना ही श्रेष्ठ माना जाता रहा है. गुह्यासूत्र, शौनक और आपस्तंब जैसे वैदिक सूत्रों के अनुसार दिन के समय विवाह करने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है.
उत्तर भारत में शादियां रात के समय करने की प्रथा का मुख्य कारण ऐतिहासिक और सुरक्षा संबंधी रहा है. पुराने समय में मुगलों और अफगानों के आक्रमणों के दौरान, हिंदू परिवार दिन में शादी नहीं कर पाते थे. उन्हें रात में अंधेरे का फायदा लेकर समारोह करना पड़ता था ताकि लूटपाट और अपहरण से बचा जा सके.
इसके साथ ही, ज्योतिषीय मान्यताएं भी रात के समय शादी को उचित मानती हैं. चंद्रमा और नक्षत्रों का शुभ प्रभाव माना जाता है. कई शुभ मुहूर्त जैसे अभिजीत और चंद्र पूजा का समय रात या भोर में होता है, जिससे शादी की रस्में और फेरे रात को आयोजित किए जाते हैं.
साथ ही, रात का समय सामाजिक रूप से भी सुविधाजनक रहा है. गांव और छोटे शहरों में रात को वातावरण शांत होता था, जिससे बारात और मेहमान सुरक्षित रहते थे.
दक्षिण और उत्तर भारत की शादी की टाइमिंग में सही या गलत जैसी कोई चीज नहीं है. यह सिर्फ इतिहास, धर्म, ज्योतिष और परंपरा का फर्क है. हर क्षेत्र की अपनी रीति-रिवाज और संस्कृति ने शादी का समय तय किया है.