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New Year 2026: इन देशों में 1 जनवरी को नया साल मनाया तो मिलती है सजा, जेल भेज देती है सरकार

स्पर्श गोयल   |  01 Jan 2026 11:50 AM (IST)
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उत्तर कोरिया में नए साल का कॉन्सेप्ट ग्रेगोरियन कैलेंडर से नहीं बल्कि देश की अपनी विचारधारा से जुड़ा हुआ है. देश जूचे कैलेंडर को मानता है जो किम इल-सुंग के जन्म वर्ष से शुरू होता है. हालांकि 1 जनवरी अधिकारी तौर पर मौजूद है लेकिन इसे पश्चिम में स्टाइल में मानने को वैचारिक भ्रष्टाचार माना जाता है. ऐसे कामों को देश के खिलाफ अपराध माना जाता है. अगर ऐसा करता हुआ कोई पकड़ा जाता है तो उसे सजा के तौर पर जबरदस्त मजदूरी और जेल कैंप से लेकर और भी ज्यादा कड़ी सजा मिल सकती है.

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सऊदी अरब आधिकारिक तौर पर इस्लामिक कैलेंडर को मानता है. यहां दशकों तक 1 जनवरी को सार्वजनिक रूप से नए साल का जश्न मनाना पूरी तरह से बैन था. आतिशबाजी, पार्टी और सार्वजनिक सभाओं की बिल्कुल इजाजत नहीं थी. हालांकि विजन 2030 के तहत कुछ पाबंदियां में ढील दी गई है लेकिन बिना इजाजत के सार्वजनिक जश्न मनाना अभी भी मना है. ऐसा करते पकड़े जाने पर जुर्माना, हिरासत या देश निकाला हो सकता है.

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ब्रुनेई में इस्लामी कानून काफी ज्यादा सख्त है. मुस्लिम नागरिकों को गैर इस्लामिक त्यौहार जिसमें 1 जनवरी भी आता है, सार्वजनिक रूप से मनाना मना है. शरिया कानून के तहत उल्लंघन करने पर 5 साल तक की जेल, भारी जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.

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सोमालिया में सरकार ने इस्लामी मूल्यों की रक्षा करने और सुरक्षा खतरों को रोकने के लिए नए साल और क्रिसमस के जश्न पर आधिकारिक तौर पर बैन लगा दिया है. 1 जनवरी को सार्वजनिक सभाओं को अक्सर सुरक्षा बल जबरदस्ती रोक देते हैं. नियमों का उल्लंघन करने वालों को गिरफ्तारी, हिरासत और कड़ी जेल हो सकती है.

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ताजिकिस्तान आधिकारिक के तौर पर नए साल का जश्न मनाता है. लेकिन उस पर सरकार का कड़ा नियंत्रण रहता है. क्रिसमस ट्री, फादर फ्रॉस्ट और आतिशबाजी जैसे पारंपरिक प्रतीकों पर स्कूल और सार्वजनिक जगहों पर बैन है. उल्लंघन करने वालों को आम तौर पर लंबे समय तक की जेल की सजा के बजाय जुर्माना, सजावट का सामान जब्त करना और प्रशासनिक दंड का सामना करना पड़ता है.

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इन सभी देशों में एक बात आम है वह है कंट्रोल. यह कंट्रोल धर्म, विचारधारा और संस्कृति पर है. सरकारों को डर है कि पश्चिमी शैली के जश्न धार्मिक पहचान को कमजोर करते हैं.

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